उत्तर प्रदेश ने BRICS और सहयोगी देशों के साथ व्यापार में बड़ी छलांग लगाई है। राज्य का एक्सपोर्ट **₹47,484 करोड़** पहुंच गया है, जो कुल सालाना एक्सपोर्ट का करीब **24%** है। इसमें मुख्य रूप से मशीनरी, फूड प्रोडक्ट्स और टेक्सटाइल्स शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश का व्यापार अब दुनिया के बड़े बाजारों में तेजी से पैर पसार रहा है। राज्य का कुल सालाना एक्सपोर्ट ₹2 लाख करोड़ का है, जिसमें से 23.7% हिस्सा अकेले BRICS और पार्टनर देशों को जाता है। यह बदलाव पारंपरिक मार्गों से हटकर एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के उभरते बाजारों की ओर एक रणनीतिक कदम है।
एक्सपोर्ट में किन सेक्टरों का दबदबा?
राज्य अब वैल्यू-एडेड मैन्युफैक्चरिंग पर जोर दे रहा है। इसमें इलेक्ट्रिकल मशीनरी और मैकेनिकल इक्विपमेंट सबसे आगे हैं। इसके साथ ही, एग्रीकल्चर और फूड प्रोडक्ट्स की डिमांड भी आसमान छू रही है। गारमेंट्स, लेदर और ज्वेलरी जैसे सेक्टर भी वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बना रहे हैं। MSMEs के लिए यह एक बड़ा मौका है, लेकिन उन्हें इंटरनेशनल क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर खरा उतरना होगा।
प्रमुख व्यापारिक पार्टनर
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) यूपी का सबसे बड़ा पार्टनर बनकर उभरा है, जहां से ₹15,133 करोड़ का एक्सपोर्ट हुआ है। यह कोर BRICS देशों के साथ होने वाले कुल व्यापार का 43% है। वहीं, सऊदी अरब और मिस्र भी फूड एक्सपोर्ट के लिए प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। वियतनाम और मलेशिया जैसे देशों के साथ भी व्यापार में 75% से ज्यादा की हिस्सेदारी देखी गई है।
निवेशकों के लिए जोखिम और निगरानी
एक्सपोर्ट का यह दायरा बढ़ने के साथ कुछ चुनौतियां भी हैं। अगर लॉजिस्टिक्स और पैकेजिंग स्टैंडर्ड्स में सुधार नहीं हुआ, तो प्रॉफिटेबिलिटी पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, UAE और पश्चिमी एशिया पर अत्यधिक निर्भरता 'कॉन्सेंट्रेशन रिस्क' पैदा करती है। निवेशकों को राज्य सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए जा रहे खर्च और कनेक्टिविटी में हो रहे सुधारों पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यही फैक्टर आगे चलकर स्थानीय उद्योगों को ग्लोबल मार्केट में कॉम्पिटिटिव बनाए रखेंगे।
