6 अक्टूबर, 2026 को यूक्रेन ने एक बड़े ड्रोन हमले में रूस के मॉस्को स्थित प्रमुख फ्यूल डिपो को निशाना बनाया है। इस घटना से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई और कमोडिटी मार्केट में भारी अस्थिरता का खतरा पैदा हो गया है।
6 अक्टूबर, 2026 को जारी सैन्य संघर्ष में एक बड़ा मोड़ आया है, जब यूक्रेनी सेना ने व्यापक ड्रोन ऑफेंसिव लॉन्च किया। रूसी अधिकारियों के अनुसार, उन्होंने मॉस्को क्षेत्र समेत कई इलाकों में लगभग 900 ड्रोन को इंटरसेप्ट किया, लेकिन वोलोदारस्काया (Volodarskaya) फ्यूल डिपो को हुए नुकसान को नहीं रोक पाए। इस हमले में 2 लोगों की मौत हुई है और कई लोग घायल हुए हैं, जो सीधे तौर पर बढ़ते हवाई युद्ध की गंभीरता को दर्शाता है।
एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर गहरा असर
यूक्रेन की रणनीति रूस की ऑयल रिफाइनिंग सुविधाओं को खत्म करने पर केंद्रित है। कीव के आधिकारिक अनुमानों के मुताबिक, लगातार हमलों से रूस की 51% से ज्यादा रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित हुई है। रूस ने खुद स्वीकार किया है कि इन दबावों के कारण उसकी जीडीपी (GDP) में 1% की गिरावट आई है। यह स्थिति ग्लोबल फ्यूल सप्लाई और डीजल एक्सपोर्ट बैन जैसे मुद्दों को हवा दे रही है, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।
आगे का जोखिम
इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब यूक्रेन बड़े जवाबी हमले की तैयारी कर रहा है। रूस के पास अभी भी लगभग 700 बैलिस्टिक मिसाइलों का रिजर्व है और वह हर महीने 130 से 140 नई मिसाइलें बनाने की क्षमता रखता है। वहीं, यूक्रेन को अपने अमेरिकी 'पैट्रियट' (Patriot) एयर डिफेंस सिस्टम के लिए गोला-बारूद की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे बुनियादी ढांचा और संवेदनशील है।
कमोडिटी और ग्लोबल सप्लाई चेन पर प्रभाव
ब्लैक सी (Black Sea) इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने और शिपिंग वेसल्स में बाधाओं के कारण अनाज और तेल के निर्यात पर असर पड़ा है। यह अनिश्चितता ग्लोबल सप्लाई चेन को बिगाड़ रही है, जो भविष्य में महंगाई (Inflation) को और बढ़ा सकती है। निवेशकों को अब ग्लोबल क्रूड प्राइसेज, एनर्जी एक्सपोर्ट पॉलिसी और ब्लैक सी की सुरक्षा स्थिति पर बारीक नजर रखनी होगी।
