भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पॉलिमर नोट ट्रायल के लिए Uflex और Spectra Systems ने संयुक्त रूप से बोली लगाई है। इस पायलट प्रोजेक्ट में **₹10** और **₹20** के नोटों के लिए प्लास्टिक-आधारित मटेरियल की टेस्टिंग की जाएगी।
भारत के करेंसी मैनेजमेंट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि RBI अब पॉलिमर-आधारित बैंकनोट्स पर विचार कर रही है। पैकेजिंग दिग्गज Uflex ने अमेरिकी ऑथेंटिकेशन विशेषज्ञ Spectra Systems के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट के लिए टेंडर भरा है। भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड के जरिए निकाले गए इस टेंडर में 68,000 रीम Biaxially Oriented Polypropylene (BOPP) मटेरियल की मांग की गई है, जिसका इस्तेमाल ₹10 और ₹20 के 1 अरब नोटों को छापने के लिए होगा।\n\n### इस कदम का मकसद क्या है?\n\nपारंपरिक कागज के नोटों की तुलना में प्लास्टिक के नोट ज्यादा टिकाऊ होते हैं और इनमें टूट-फूट व नकली नोटों का खतरा कम होता है। दुनिया भर के 60 से अधिक देशों में पॉलिमर नोटों का इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन भारत के लिए यह तकनीकी रूप से एक बड़ी चुनौती है। टेंडर प्रक्रिया जुलाई 2026 में शुरू हुई थी और इसमें हाई-ग्रेड प्रिंटिंग क्वालिटी के कड़े मानक तय किए गए हैं।\n\n### निवेश का नजरिया और प्रतिस्पर्धा\n\nनिवेशकों के लिए यह Uflex के पोर्टफोलियो में एक नए बिजनेस वर्टिकल के रूप में उभर सकता है। हालांकि, यह राह आसान नहीं है क्योंकि Cosmo First (De La Rue के साथ), Q&T Hi-Tech Polymer (Pigments and Allieds के साथ) और CCL Secure जैसी दिग्गज कंपनियां भी इस दौड़ में शामिल हैं।\n\n### रिस्क फैक्टर्स और सावधानी\n\nनिवेशकों को यह समझना होगा कि यह फिलहाल एक 'पायलट प्रोजेक्ट' है। भारत में अतीत में भी प्लास्टिक नोटों को लाने की कोशिशें हुई थीं, जो तकनीकी कारणों से सफल नहीं हो पाई थीं। इसके अलावा, BOPP जैसे कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव कंपनी के मुनाफे पर असर डाल सकता है। फिलहाल बाजार की नजरें टेक्निकल इवैल्यूएशन और फाइनल सप्लायर सिलेक्शन पर टिकी हैं, क्योंकि बड़े पैमाने पर कॉन्ट्रैक्ट मिलना अभी भी दूर की कौड़ी है।
