दिग्गज बैंकर Uday Kotak ने ग्लोबल इंटरेस्ट रेट मार्केट में अस्थिरता को लेकर निवेशकों को आगाह किया है। जापान और अमेरिका में सरकारी बॉन्ड यील्ड दशकों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है, जिससे महंगाई बढ़ने और भारतीय बाजार पर दबाव पड़ने का खतरा है।
दिग्गज बैंकर Uday Kotak ने आने वाले समय में ग्लोबल इंटरेस्ट रेट मार्केट के लिए एक चुनौतीपूर्ण दौर का संकेत दिया है। Kotak के मुताबिक, लंबी अवधि के लिए उधारी की लागत (borrowing costs) में स्थिरता का दौर अब खत्म हो रहा है, क्योंकि सरकारी बॉन्ड यील्ड उन स्तरों पर पहुंच गई है जो कई दशकों में नहीं देखे गए। यह चेतावनी तब आई है जब वैश्विक स्तर पर बढ़ते कर्ज और लगातार बढ़ती महंगाई का दबाव बना हुआ है।
ग्लोबल बॉन्ड मार्केट का हाल
जापान में 10-year सरकारी बॉन्ड यील्ड हाल ही में 3% के पार निकल गई है, जो कि 1996 के बाद का उच्चतम स्तर है। वहीं, अमेरिका में भी हालात कमोबेश ऐसे ही हैं। वहां 30-year ट्रेजरी नोट्स की यील्ड 5% से ऊपर बनी हुई है, जबकि 10-year यील्ड 4.8% के करीब पहुंच गई है।
महंगाई और उधारी का रिस्क
Uday Kotak ने विस्तार से समझाया कि सरकारें अपने फिस्कल डेफिसिट (fiscal deficit) से जूझ रही हैं, जिससे कर्ज चुकाने की लागत बढ़ रही है। अगर सेंट्रल बैंक को इस कर्ज को मैनेज करने के लिए अपनी बैलेंस शीट बढ़ानी पड़ी, तो इसका सीधा मतलब है—ज्यादा नोट छापना। यह बढ़ती लिक्विडिटी महंगाई (inflation) को और हवा देगी, जिससे इंटरेस्ट रेट में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
- कैपिटल आउटफ्लो: जब अमेरिका जैसे देशों के सुरक्षित सरकारी बॉन्ड पर ज्यादा रिटर्न मिलेगा, तो विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर वहां शिफ्ट हो सकते हैं।
- करेंसी पर दबाव: विदेशी निवेश घटने से भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।
- कॉर्पोरेट मार्जिन: जिन भारतीय कंपनियों ने विदेश से कर्ज लिया है, उनकी रीपेमेंट लागत बढ़ सकती है, जिसका असर सीधा उनके नेट प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ेगा।
आने वाले दिनों में निवेशकों को US Federal Reserve और Bank of Japan के बयानों पर पैनी नजर रखनी होगी, क्योंकि यही ग्लोबल लिक्विडिटी की दिशा तय करेंगे। इसके अलावा, कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें और भारत का घरेलू महंगाई डेटा Reserve Bank of India (RBI) की अगली चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
