दिग्गज बैंकर Uday Kotak ने भारत के 2047 के विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सख्त फिस्कल कंट्रोल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करने पर जोर दिया है। उन्होंने कंसोलिडेटेड फिस्कल डेफिसिट पर चिंता जताई है।
फिस्कल डेफिसिट पर चिंता
Kotak Mahindra Bank के पूर्व प्रमुख Uday Kotak ने स्टेट फाइनेंस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का कंसोलिडेटेड फिस्कल डेफिसिट (केंद्र और राज्य सरकार का कुल खर्च) 7% से ऊपर बना हुआ है। उन्होंने इसकी तुलना अमेरिका से की, जहां यह आंकड़ा 6% के आसपास है। उनका मानना है कि लंबी अवधि की आर्थिक स्थिरता के लिए बेहतर पब्लिक स्पेंडिंग मैनेजमेंट अनिवार्य है।
मैन्युफैक्चरिंग और इंपोर्ट पर लगाम
Kotak के मुताबिक, भारत को विदेशी सामानों पर निर्भरता कम करने के लिए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बड़े पैमाने पर बढ़ाना होगा। ग्लोबल मार्केट की मांग के हिसाब से उत्पादन करने पर उनका खास जोर है, ताकि एक्सपोर्ट को बूस्ट मिल सके और घरेलू स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हों।
रियल इकॉनमी बनाम फाइनेंशियल एसेट्स
उन्होंने 'ओवर-फाइनेंशियलाइजेशन' (Over-financialization) के जोखिम को लेकर चेतावनी दी है। जब पैसा फैक्ट्रियों और इंफ्रास्ट्रक्चर के बजाय सिर्फ शेयर बाजार और बॉन्ड्स जैसे फाइनेंशियल एसेट्स में फंस जाता है, तो असली आर्थिक विकास की रफ्तार सुस्त पड़ सकती है। उनके अनुसार, पूंजी का प्रवाह वास्तविक व्यवसायों के विस्तार में भी होना चाहिए।
गोल्ड का बेहतर उपयोग
देश के करंट अकाउंट पर दबाव कम करने के लिए Uday Kotak ने घरों में जमा गोल्ड को उत्पादक निवेश में बदलने का सुझाव दिया है। यदि घरों में रखी इस निष्क्रिय संपत्ति को सिस्टम में लाया जाए, तो इंपोर्ट बिल कम करने और विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को मजबूत करने में बड़ी मदद मिल सकती है।
