दिग्गज बैंकर Uday Kotak का मानना है कि भारतीय शेयरों के वैल्यूएशन अब पहले के मुकाबले काफी आकर्षक हो गए हैं। जहां ग्लोबल मार्केट में AI शेयरों से पैसा निकल रहा है, वहीं घरेलू रिटेल निवेशकों की बदौलत भारतीय बाजार मजबूती दिखा रहे हैं।
दिग्गज बैंकर Uday Kotak ने संकेत दिए हैं कि भारतीय बाजारों का वैल्यूएशन अब और अधिक प्रतिस्पर्धी हो गया है। एक समय था जब ऊंचे वैल्यूएशन के चलते विदेशी निवेशक दूर भाग रहे थे, लेकिन पिछले एक साल में भारतीय बाजार और ग्लोबल पीयर्स के बीच का अंतर काफी कम हो गया है। यह बदलाव उन निवेशकों के लिए अवसर है जो अब तकनीकी शेयरों (Tech-heavy markets) के विकल्प तलाश रहे हैं।
क्यों बदल रही है ग्लोबल हवा?
बीते समय में ग्लोबल मार्केट का सारा फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर था, जहां अंधाधुंध पैसा झोंका गया। लेकिन अब इस बात पर सवाल उठने लगे हैं कि क्या AI पर होने वाला यह भारी-भरकम खर्च (Capital Expenditure) सस्टेनेबल है? अगर ग्लोबल निवेशक अपनी रणनीति बदलते हैं, तो पूंजी का प्रवाह वापस भारत जैसे ग्रोथ वाले बाजारों की ओर मुड़ सकता है।
2026 की चुनौतियां और बाजार की ताकत
साल 2026 भारतीय बाजार के लिए कठिन रहा है, जहां विदेशी संस्थागत निवेशकों ने $29 बिलियन की भारी निकासी की। इसके बावजूद, घरेलू बाजार ने हिम्मत नहीं हारी। अक्टूबर 2026 के निचले स्तरों से भारतीय बाजार में करीब 10% की रिकवरी देखी गई है। इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी ताकत हमारे घरेलू रिटेल निवेशक रहे हैं, जिन्होंने बिकवाली के दबाव को बखूबी झेला है।
आगे की राह में क्या हैं रोड़े?
सब कुछ आसान नहीं है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) लगातार महंगाई को काबू में करने के लिए सख्त रुख अपनाए हुए है। अक्टूबर 2026 में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के बाद रेपो रेट 5.50% पर पहुंच गया है। जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में इसमें 50 से 75 बेसिस पॉइंट की और बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे कंपनियों के लिए कर्ज लेना महंगा होगा।
इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, इसलिए तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर देश के ट्रेड बैलेंस और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ता है।
