25 सितंबर को रुपया **95.90** के स्तर पर मामूली मजबूती के साथ खुला। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के दबाव के बीच RBI की दखलंदाजी रुपए को **96.00** के स्तर से ऊपर जाने से रोक रही है।
बाजार की स्थिति और RBI का दखल
रुपया आज पिछले बंद भाव 95.96 के मुकाबले 6 पैसे की बढ़त के साथ 95.90 पर खुला। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लगातार बाजार में सक्रिय है ताकि वोलेटिलिटी को मैनेज किया जा सके और करेंसी को 96.00 के स्तर को पार करने से रोका जा सके।
ग्लोबल प्रेशर और कमोडिटी मार्केट
रुपए पर ग्लोबल दबाव की मुख्य वजहें हैं:
- क्रूड ऑयल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल $106 प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है, जो भारत के इंपोर्ट बिल को सीधा प्रभावित करता है।
- US Treasury Yield: अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड बढ़कर 5.1930% पर पहुंच गई है, जो फेडरल रिजर्व की सख्त पॉलिसी के संकेतों को दिखाती है।
- डॉलर इंडेक्स: डॉलर इंडेक्स 101.27 पर बना हुआ है, जिससे उभरते बाजारों की करेंसीज पर चौतरफा दबाव है।
निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है?
रुपए में उतार-चढ़ाव का सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ता है जो इंपोर्ट पर निर्भर हैं, जैसे कि ऑयल रिफाइनिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर। डॉलर के मुकाबले रुपए के कमजोर होने से इन कंपनियों की लागत बढ़ती है, जिससे नेट प्रॉफिट मार्जिन पर चोट पड़ती है। इसके उलट, IT जैसी एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड कंपनियां रुपए की कमजोरी से लाभान्वित हो सकती हैं।
फिलहाल ट्रेडर्स को उम्मीद है कि रुपया आने वाले समय में 95.75 से 96.25 की रेंज में ही ट्रेड करेगा। अब सबकी नजरें इस पर हैं कि क्या RBI कच्चे तेल और बॉन्ड यील्ड के इस बढ़ते दबाव में रुपए को इसी तरह स्टेबल रख पाएगा या नहीं।
