US और Japan के बॉन्ड यील्ड्स ने कई वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। US में यील्ड **2007** के बाद और जापान में **1996** के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं, जिससे ग्लोबल मार्केट में हड़कंप है।
ग्लोबल डेट मार्केट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। 10-year US Treasury yield उछलकर 5.125% पर पहुंच गया है, जो 2007 के बाद का उच्चतम स्तर है। वहीं, जापान का 10-year government bond yield बढ़कर 3.075% हो गया है, जो अगस्त 1996 के बाद से सबसे ज्यादा है। यह साफ संकेत है कि सेंट्रल बैंक महंगाई को काबू करने के लिए ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखेंगे।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?
जब US में बॉन्ड यील्ड बढ़ता है, तो निवेशक सुरक्षित एसेट्स की तरफ भागते हैं। इससे उभरते बाजारों (Emerging Markets) जैसे भारत से विदेशी निवेश (FII) बाहर निकल सकता है। इसके अलावा, मजबूत डॉलर के कारण रुपया कमजोर हो सकता है, जिससे कच्चा तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे इम्पोर्ट्स महंगे हो जाएंगे।
कंपनियों पर दबाव
जो भारतीय कंपनियां विदेशी मुद्रा में कर्ज लेती हैं, उनके लिए अब लोन चुकाना और रिफाइनेंसिंग करना महंगा हो जाएगा। इससे कंपनियों के नेट प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
ग्लोबल मार्केट का मूड
Federal Reserve के सख्त रुख और वेस्ट एशिया में जारी तनाव के कारण बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। MSCI Asia ex-Japan Index में 0.94% की गिरावट दर्ज की गई है। फिलहाल सबकी नजरें US प्रेसिडेंट Donald Trump और Chinese प्रेसिडेंट Xi Jinping की आगामी समिट पर टिकी हैं, जिससे ट्रेड ट्रूस को लेकर स्थिति साफ हो सकती है। कच्चे तेल की कीमतें भी $102.27 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, और बाजार अब US के नए इकोनॉमिक डेटा (Jobless claims और New home sales) का इंतजार कर रहा है।
