US और चीन के अधिकारी 24 सितंबर को होने वाली Trump-Xi समिट से पहले एनर्जी और एग्रीकल्चर सेक्टर में टैरिफ कम करने पर बातचीत कर रहे हैं। इस संभावित डील से **$30 बिलियन** के ट्रेड को फायदा मिल सकता है, लेकिन निवेशकों को टेक्नोलॉजी और जियो-पॉलिटिकल तनावों पर नजर रखनी चाहिए।
ट्रेड थॉ (Trade Thaw) की तैयारी
अमेरिका और चीन के बीच चल रही इस हाई-लेवल बातचीत का मुख्य मकसद ग्लोबल मार्केट में स्टेबिलिटी लाना है। ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent और चीनी वाइस प्रीमियर He Lifeng इस वीकेंड पर मुलाकात कर सकते हैं ताकि एक संभावित एग्रीमेंट को अंतिम रूप दिया जा सके। अगर यह योजना सफल होती है, तो $30 बिलियन के ट्रेड वॉल्यूम पर ड्यूटी कम की जा सकती है, जिससे उन कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी जो इंपोर्टेड मैन्युफैक्चरिंग इनपुट पर निर्भर हैं।
डिप्लोमेटिक तैयारी और चुनौतियां
चीन के विदेश मंत्री Wang Yi और अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट Marco Rubio ने भी गुरुवार को फोन पर बात की है ताकि समिट के एजेंडे को सेट किया जा सके। हालांकि आर्थिक मोर्चे पर यह कोशिश सकारात्मक दिख रही है, लेकिन चुनौतियां अभी भी कायम हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि टेक्नोलॉजी सेक्टर की प्रतिस्पर्धा और रूस-ईरान के साथ रणनीतिक मतभेद अभी भी एक बड़ी बाधा बने हुए हैं।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, खासकर 'Strait of Hormuz' को लेकर जारी अनिश्चितता डिप्लोमेटिक बातचीत को और जटिल बना रही है। निवेशकों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी है यह देखना कि क्या समिट में कोई औपचारिक समझौता होता है या नहीं। टैरिफ में मामूली राहत से बाजार में शॉर्ट-टर्म उछाल तो आ सकता है, लेकिन लॉन्ग-टर्म स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या दोनों देश अपने गहरे स्ट्रक्चरल विवादों को सुलझा पाते हैं या नहीं।
