अमेरिका की सरकार सेमीकंडक्टर और टेक हार्डवेयर पर नए टैरिफ लगाने पर विचार कर रही है। इसमें लैपटॉप और सर्वर जैसे प्रोडक्ट्स शामिल हो सकते हैं, जिससे टेक सेक्टर में उठापटक की आशंका बढ़ गई है।
अमेरिकी सरकार सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी हार्डवेयर इंडस्ट्री पर टैरिफ का दायरा बढ़ाने की तैयारी कर रही है। अगस्त 2026 के अंत में सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये नए नियम सिर्फ माइक्रोचिप्स तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इनमें लैपटॉप, गेमिंग कंसोल और एंटरप्राइज-ग्रेड डेटा सेंटर सर्वर्स जैसे तैयार प्रोडक्ट्स को भी शामिल किया जा सकता है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य मैन्युफैक्चरिंग को विदेशों से हटाकर अमेरिका में शिफ्ट करना है।
Howard Lutnick का मास्टर प्लान
अमेरिकी कॉमर्स सेक्रेटरी Howard Lutnick इस नई टैरिफ रणनीति के पीछे प्रमुख चेहरा माने जा रहे हैं। उनका प्रस्ताव एक तरह का 'ट्रेड-ऑफ' है: अगर विदेशी कंपनियां अमेरिका में ही सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने का वादा करती हैं, तो उन्हें इन नए टैरिफ से छूट मिल सकती है। इस मैकेनिज्म का मकसद ग्लोबल कंपनियों को मजबूर करना है कि वे अपनी प्रोडक्शन लाइन अमेरिका के करीब लाएं।
निवेशकों के लिए क्यों है यह चिंताजनक?
हालांकि व्हाइट हाउस या कॉमर्स डिपार्टमेंट की तरफ से अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस खबर ने ग्लोबल टेक मार्केट में अनिश्चितता पैदा कर दी है। सबसे बड़ी चिंता सप्लाई चेन के टूटने की है। अगर ये टैरिफ लागू होते हैं, तो डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए हार्डवेयर इंपोर्ट करने वाली कंपनियों की लागत काफी बढ़ जाएगी।
इसका सीधा असर कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ सकता है, क्योंकि बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों तक पहुंचाना आसान नहीं होगा। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जो कंपनियां अपनी मैन्युफैक्चरिंग पहले से ही विदेशी बाजारों में जमा चुकी हैं, उनके लिए यह एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। फिलहाल, निवेशक US कॉमर्स डिपार्टमेंट के आधिकारिक अपडेट का इंतजार कर रहे हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कौन से प्रोडक्ट इस दायरे में आएंगे और किन कंपनियों को छूट मिलेगी।
