भारत के लिए एनर्जी सेक्टर से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका ने रूस से आयात होने वाले कच्चे तेल पर लगने वाले टैरिफ के खतरे को टाल दिया है। रूस भारत की जरूरत का **30%** से ज्यादा कच्चा तेल सप्लाई करता है, ऐसे में यह छूट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी राहत है।
अमेरिका का बड़ा फैसला
अमेरिका ने 2026 के सैंक्शन्स एक्ट के तहत भारत के लिए राहत का ऐलान किया है। इससे भारतीय मार्केट में छाए 100% टैरिफ के डर को खत्म कर दिया गया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का 85% से ज्यादा हिस्सा आयात करता है, जिसमें से 30% से अधिक सप्लाई रूस से आती है। इस छूट से सप्लाई चेन बिना किसी रुकावट के चलती रहेगी।
तेल की कीमतों का गणित
पहले भारत को रूसी तेल पर भारी डिस्काउंट मिलता था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। वर्तमान में रूसी क्रूड $117 प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है, जबकि ब्रेंट क्रूड की कीमत $120 प्रति बैरल है। अब भारत की प्राथमिकता सस्ता तेल नहीं, बल्कि सप्लाई की निरंतरता (Stable Supply) बनी हुई है।
महंगाई और इकोनॉमी पर असर
भले ही टैरिफ का खतरा टल गया हो, लेकिन क्रूड की ऊंची कीमतें अभी भी चिंता का विषय हैं। ब्रेंट क्रूड का $100 प्रति बैरल से ऊपर बना रहना देश की महंगाई (Inflation) और चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) पर दबाव डाल सकता है। हालांकि, सरकार का मानना है कि चालू खाते का घाटा 0.8% से 1.2% GDP के दायरे में रहेगा।
बैंकिंग सेक्टर और आगे की राह
भारतीय बैंकिंग सेक्टर अभी मजबूत है और बैड लोन (NPA) के आंकड़े भी नियंत्रित हैं। इसके अलावा, IDBI बैंक में हिस्सेदारी बेचने जैसे कदम राजकोषीय मजबूती (Fiscal Consolidation) की दिशा में मददगार साबित हो रहे हैं। निवेशकों को अब ग्लोबल क्रूड बेंचमार्क पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में अचानक बड़ा उछाल देश की महंगाई कंट्रोल करने की कोशिशों को झटका दे सकता है।
