अमेरिका के ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने बॉन्ड मार्केट को राहत देने के लिए बड़े लॉन्ग-डेटेड बॉन्ड की बायबैक को दोगुना करने का फैसला किया है। इस कदम के बाद एशियाई शेयर बाजारों में जोरदार तेजी देखी गई, खासकर साउथ कोरिया का Kospi इंडेक्स करीब 6% चढ़ा। हालांकि, ईरान-अमेरिका तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें $93 प्रति बैरल के पार चली गईं।
यूएस ट्रेजरी का बड़ा फैसला: बॉन्ड मार्केट में आएगी स्थिरता?
गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को वैश्विक वित्तीय बाजारों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने एक अहम घोषणा की। ट्रेजरी विभाग ने लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड की बायबैक (buyback) को दोगुना करने की योजना बनाई है। अब यह बायबैक प्रति ऑपरेशन कम से कम $4 अरब का होगा, जो 9 सितंबर से लागू होगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य लॉन्ग-टर्म सरकारी बॉन्ड पर दबाव को कम करके बॉन्ड मार्केट को स्थिर करना है।
एशियाई बाजारों में आई रौनक
जब सरकारी बॉन्ड यील्ड (yield) गिरती है, तो यह अक्सर निवेशकों के लिए शेयरों को और भी आकर्षक बना देती है, जिससे इक्विटी बाजारों को मजबूती मिलती है। इसका असर एशियाई बाजारों में साफ तौर पर देखने को मिला। साउथ कोरिया का Kospi इंडेक्स लगभग 6% उछल गया। इस तेजी को SK Hynix जैसी बड़ी टेक कंपनियों द्वारा बड़े शेयर बायबैक की योजनाओं और Samsung Electronics से भारी शेयरधारक रिटर्न की उम्मीदों जैसी कॉरपोरेट खबरों ने भी सहारा दिया। Nikkei 225 और Hang Seng सहित अन्य एशियाई सूचकांकों में भी बढ़त देखी गई, जबकि यूरोपीय बाजार अधिक सतर्क दिखे।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
जहां बॉन्ड मार्केट की खबरों से राहत मिली, वहीं ऊर्जा क्षेत्र में दबाव बढ़ा। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें दिन के कारोबार में 2% से अधिक बढ़कर लगभग $93.61 प्रति बैरल हो गईं। इस उछाल का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बने भू-राजनीतिक तनाव हैं। राजनयिक बातचीत में प्रगति की कमी ने तेल आपूर्ति श्रृंखलाओं को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिससे कीमतें संघर्ष-पूर्व स्तरों से काफी ऊपर बनी हुई हैं।
आगे क्या?
निवेशक अब इन प्रतिस्पर्धी कारकों का आकलन कर रहे हैं कि वे व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण को कैसे प्रभावित करेंगे। हालांकि ट्रेजरी के कदम का उद्देश्य बाजार की लिक्विडिटी (liquidity) में सुधार करना है, लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था महत्वपूर्ण जोखिमों से जूझ रही है। अमेरिका का राष्ट्रीय ऋण लगभग $40 ट्रिलियन तक पहुंच गया है, और लगातार महंगाई चिंता का विषय बनी हुई है, जिससे फेडरल रिजर्व के भविष्य के ब्याज दरों के फैसले अनिश्चित बने हुए हैं। बाजार में अस्थिरता एक संभावित मुद्दा बनी हुई है, क्योंकि निवेशक यह देख रहे हैं कि क्या सरकारी हस्तक्षेप से मुद्रास्फीति के दबाव को और बढ़ाए बिना उधार लेने की लागत स्थायी रूप से कम हो सकती है।
