US Treasury Yields: 4.68% पर पहुंचे बॉन्ड यील्ड्स, भारतीय रुपया और सोने पर दबाव

ECONOMY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
US Treasury Yields: 4.68% पर पहुंचे बॉन्ड यील्ड्स, भारतीय रुपया और सोने पर दबाव

अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स (US Treasury Yields) में लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर अब भारतीय बाजारों पर भी दिखने लगा है। भू-राजनीतिक तनाव के चलते यील्ड्स **4.68%** के पार पहुंच गई हैं, जिससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हो रहा है और भारतीय रुपया **95.28** के करीब दबाव में है।

क्यों चढ़ रहे हैं US Treasury Yields?

दुनिया भर के बाजारों के लिए अहम माने जाने वाले अमेरिकी 10-साल के ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड्स 4.68% के स्तर पर बने हुए हैं। इसकी मुख्य वजह लगातार बनी हुई महंगाई की चिंताएं और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। जब US गवर्नमेंट बॉन्ड यील्ड्स बढ़ती हैं, तो ये ग्लोबल कैपिटल को अपनी ओर खींचती हैं। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है और उभरते बाजारों (Emerging Markets) के लिए आर्थिक मुश्किलें बढ़ जाती हैं।

भारतीय रुपये पर असर

फिलहाल भारतीय रुपये के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। रुपया डॉलर के मुकाबले 95.28 के स्तर के आसपास बना हुआ है। इस दबाव के दो मुख्य कारण हैं: पहला, मजबूत डॉलर के चलते आयात महंगा हो रहा है। दूसरा, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के इंपोर्ट बिल को और बढ़ा रही हैं, क्योंकि तेल का भुगतान डॉलर में ही होता है। इस स्थिति में रुपये की मांग बढ़ती है, जिससे रुपये पर दबाव आता है। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अक्सर ऐसे उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए बाजार में दखल देता है, लेकिन लंबी अवधि का ट्रेंड ग्लोबल इंटरेस्ट रेट्स पर ही निर्भर करेगा।

इक्विटी मार्केट पर भी असर

अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स का असर भारतीय इक्विटी मार्केट, खासकर निफ्टी 50 पर भी देखा जा रहा है। जब US ट्रेजरी यील्ड्स बढ़ती हैं, तो फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिकी बॉन्ड में लगाना पसंद करते हैं, जहां उन्हें बेहतर और सुरक्षित रिटर्न मिल सकता है। इससे भारतीय बाजार से फंड का आउटफ्लो (Outflow) बढ़ता है, जो लिक्विडिटी और वैल्यूएशन को प्रभावित करता है। हालांकि निफ्टी 50 ने कुछ मौकों पर मजबूती दिखाई है, लेकिन लगातार ऊंची यील्ड्स भारतीय बाजार के लिए एक हेडविंड (Headwind) की तरह काम कर सकती है और तेजी पर लगाम लगा सकती है।

सोने की कीमतों में खींचतान

सोने की कीमतें इस समय एक अनोखे संघर्ष में फंसी हुई हैं। एक तरफ, भू-राजनीतिक तनाव के समय सोना एक सुरक्षित निवेश (Safe Haven) माना जाता है, जो इसकी कीमतों को सहारा देता है। दूसरी तरफ, सोना कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं देता। जब बॉन्ड यील्ड्स बढ़ती हैं, तो सोने की तुलना में बॉन्ड ज्यादा आकर्षक लगने लगते हैं। इस वजह से, भू-राजनीतिक डर सोने की कीमतों को ऊपर धकेलने की कोशिश करता है, जबकि ऊंची बॉन्ड यील्ड्स इसे ऊपर जाने से रोकती हैं। यदि यील्ड्स और बढ़ती हैं, तो सोने के लिए लंबी अवधि में अपनी कीमतों को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।

आगे क्या?

आगे इन सभी एसेट्स की दिशा अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) के अगले कदमों पर निर्भर करेगी। हालांकि कुछ जानकारों को ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद है, पर फेडरल रिजर्व अभी भी सख्त रुख अपनाए हुए है। निवेशक अब आने वाली सेंट्रल बैंक मीटिंग्स और कच्चे तेल की कीमतों पर करीबी नजर रखेंगे। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में किसी भी तरह का तनाव तेल की कीमतों को और बढ़ा सकता है, जिससे महंगाई ऊंची रह सकती है और ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.