US 30-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड गिरकर **5.38%** पर आ गई है। निवेशक अब AI-लिंक्ड टेक शेयरों से पैसा निकालकर सुरक्षित सरकारी बॉन्ड्स में निवेश कर रहे हैं, जो AI की मुनाफे की क्षमता पर उठ रहे सवालों की ओर इशारा करता है।
गुरुवार को ग्लोबल मार्केट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। निवेशक अब महंगे टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्टॉक्स से निकलकर US सरकारी बॉन्ड्स का रुख कर रहे हैं। 30-वर्षीय US ट्रेजरी यील्ड घटकर 5.38% पर आ गई है, जो 23 सितंबर के बाद का निचला स्तर है। यह शिफ्ट साफ दिखाता है कि बाजार में जोखिम बढ़ रहा है और निवेशक अब सुरक्षित निवेश की तलाश में हैं।\n\n### निवेशक क्यों हैं सतर्क?\n\nअमेरिकी टेक कंपनियों के हालिया नतीजों के बाद से ही माहौल बदला है। बाजार में अब इस बात पर चर्चा तेज हो गई है कि क्या AI में किया गया भारी-भरकम निवेश आने वाले समय में ठोस मुनाफा देगा या नहीं। निवेशकों को डर है कि हाई-वैल्यूएशन वाले टेक शेयरों के दाम उनके फाइनेंशियल परफॉरमेंस को जस्टिफाई नहीं कर पा रहे हैं। इसी वजह से 'हाई-बीटा' (High-Beta) टेक स्टॉक्स से पैसा निकालकर सरकारी डेट में लगाया जा रहा है।\n\n### भारतीय बाजार पर क्या होगा असर?\n\nभारतीय निवेशकों के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण है क्योंकि US बॉन्ड यील्ड का सीधा असर विदेशी निवेश (FPI) पर पड़ता है। जब ग्लोबल स्तर पर 'रिस्क-ऑफ' (Risk-off) का माहौल बनता है, तो उभरते बाजारों जैसे कि भारत से विदेशी पैसा बाहर जा सकता है। इसके अलावा, भारतीय IT कंपनियां जो ग्लोबल टेक चेन का हिस्सा हैं, उन पर भी इन सेंटीमेंट्स का असर पड़ता है। यदि ग्लोबल टेक खर्च में सुस्ती आती है, तो इसका सीधा असर भारतीय IT सेक्टर की वैल्यूएशन पर भी दिख सकता है।\n\n### बाजार की स्थिति\n\nअक्टूबर में ट्रेजरी रिटर्न्स में करीब 1.2% का सुधार देखा गया है, जो सितंबर की गिरावट के बाद राहत की बात है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि बड़ी टेक कंपनियां अपने AI खर्च और उससे होने वाली कमाई के बारे में कितनी स्पष्टता दिखाती हैं।
