US-China Trade War: चीन पर अमेरिका के कड़े तेवर, भारतीय निवेशकों के लिए क्या हैं मौके और चुनौतियां?

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
US-China Trade War: चीन पर अमेरिका के कड़े तेवर, भारतीय निवेशकों के लिए क्या हैं मौके और चुनौतियां?

US Trade Representative Jamieson Greer ने चीन के औद्योगिक ओवरकैपेसिटी (Overcapacity) के खिलाफ जांच शुरू करने के संकेत दिए हैं। भारतीय निवेशकों के लिए यह ग्लोबल सप्लाई चेन शिफ्ट एक दोधारी तलवार है, जो निर्यात के मौके भी दे रही है और 'डंपिंग' का जोखिम भी।

अमेरिका की नई रणनीति और सेक्शन 301

US Trade Representative Jamieson Greer ने साफ कर दिया है कि अमेरिका, Trade Act of 1974 के 'सेक्शन 301' के तहत चीन के मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट की जांच करेगा। अमेरिकी प्रशासन का लक्ष्य चीन द्वारा दी जाने वाली सरकारी सब्सिडी और ओवरप्रोडक्शन पर लगाम लगाना है। हालांकि, अमेरिका मौजूदा टैरिफ कैप्स (Tariff caps) का सम्मान करते हुए इस पूरे मामले को सुलझाना चाहता है ताकि ग्लोबल ट्रेड में अफरा-तफरी न मचे।

भारतीय कंपनियों के लिए बड़े मौके

जैसे-जैसे दुनिया चीन पर निर्भरता कम कर रही है, भारत के लिए निर्यात बढ़ाने का बड़ा मौका बन गया है। केमिकल्स, टेक्सटाइल्स, स्टील और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर्स की भारतीय कंपनियां ग्लोबल मार्केट में अपनी जगह बना सकती हैं। यदि अमेरिकी प्रतिबंध कड़े रहते हैं, तो भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को एक्सपोर्ट ऑर्डर्स में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

डंपिंग का बड़ा जोखिम

निवेशकों को एक बड़े खतरे पर नजर रखनी होगी, जिसे 'री-डायरेक्टेड डंपिंग' कहते हैं। यदि चीनी माल अमेरिका नहीं जा पाएगा, तो वे अपना सरप्लस माल भारत जैसे देशों में बेहद कम कीमतों पर बेचना शुरू कर सकते हैं। इससे भारतीय कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। बाजार पर नजर रखने वालों का मानना है कि आने वाले समय में घरेलू इंडस्ट्री को बचाने के लिए भारत सरकार को एंटी-डंपिंग ड्यूटी (Anti-dumping duties) को और सख्त करना पड़ सकता है।

क्रिटिकल मिनरल्स: एक नई दौड़

US और EU जिस तरह चीन से अपनी सप्लाई चेन को अलग (Decoupling) कर रहे हैं, उससे क्रिटिकल मिनरल्स की अहमियत बढ़ गई है। भारत के माइनिंग और मिनरल प्रोसेसिंग सेक्टर्स के लिए यह एक लंबा और सुनहरा दौर साबित हो सकता है। निवेशकों के लिए अगले कुछ महीनों तक अमेरिकी जांच की प्रोग्रेस और भारतीय कंपनियों के एक्सपोर्ट वॉल्यूम पर नजर रखना बहुत जरूरी है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.