अमेरिकी बाजारों में इस हफ्ते भारी बिकवाली देखने को मिली है। AI इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के मुनाफे पर उठते सवालों और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों का सेंटीमेंट बिगाड़ दिया है, साथ ही फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ गई है।
अमेरिकी टेक्नोलॉजी सेक्टर, जिसने इस साल की शुरुआत में बाजार की रैली को लीड किया था, अब गंभीर जांच के घेरे में है। निवेशक अब यह सोचने पर मजबूर हैं कि क्या AI इन्फ्रास्ट्रक्चर पर किया जा रहा भारी खर्च भविष्य में मुनाफे में बदल पाएगा। इसका असर कंपनियों के शेयरों पर साफ दिख रहा है। डेटा सेंटर ऑपरेटर CoreWeave के शेयरों में इस हफ्ते 12% की गिरावट आई है और कंपनी का बॉन्ड यील्ड 15% के पार निकल गया है। इसके अलावा, चिप निर्माता Broadcom में 3.6% की गिरावट दर्ज की गई, जिससे ब्रॉडर सेमीकंडक्टर इंडेक्स 2.5% लुढ़क गया। साथ ही, Anthropic के IPO वैल्यूएशन को लेकर भी निवेशक अब दोबारा सोच रहे हैं।
ग्लोबल प्रेशर और फेड की चाल
मिडिल ईस्ट में सप्लाई को लेकर पैदा हुई चिंताओं के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 3% से ज्यादा बढ़ गई हैं, जिससे कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ने की आशंका है। इस बीच, अमेरिकी महंगाई के डेटा और Barclays के एनालिस्टों द्वारा दिसंबर और जनवरी में ब्याज दरें बढ़ाए जाने के अनुमानों ने बाजार की उम्मीदों को झटका दिया है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
भारतीय IT सेक्टर का अमेरिकी टेक परफॉर्मेंस से सीधा नाता है। यदि अमेरिका में टेक कंपनियां बजट में कटौती करती हैं, तो इसका असर भारतीय IT कंपनियों के रिवेन्यू आउटलुक पर पड़ना तय है। साथ ही, अगर अमेरिकी ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं, तो विदेशी निवेशक इमर्जिंग मार्केट्स से पैसा निकाल कर अमेरिकी डेट (Debt) की तरफ रुख कर सकते हैं, जिससे भारतीय शेयरों पर दबाव बन सकता है। अब निवेशकों की नजरें प्रमुख अमेरिकी कंपनियों के अर्निंग्स रिपोर्ट्स और फेडरल रिजर्व की टिप्पणियों पर टिकी हैं।
