US Tariff Threat: भारतीय एक्सपोर्टर्स पर मंडराया संकट, **100%** तक बढ़ सकता है इंपोर्ट ड्यूटी का बोझ

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
US Tariff Threat: भारतीय एक्सपोर्टर्स पर मंडराया संकट, **100%** तक बढ़ सकता है इंपोर्ट ड्यूटी का बोझ

US की नई प्रस्तावित लेजिस्लेशन से भारतीय निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। रूस से एनर्जी ट्रेड के कारण भारत पर **100%** तक टैरिफ लगाने की चेतावनी दी गई है, जिसका सीधा असर इंजीनियरिंग, फार्मा और टेलीकॉम सेक्टर पर पड़ेगा।

व्यापार पर गहराता संकट

भारतीय निर्यातकों के लिए 'Sanctioning Russia and Iran Act' के तहत एक बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। यह कानून उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की अनुमति देता है जो रूस के साथ एनर्जी ट्रेड जारी रखते हैं। चूँकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट पार्टनर है, इसलिए यह नई प्रस्तावित नीति द्विपक्षीय व्यापार के लिए एक बड़ा खतरा बनकर उभरी है।

आर्थिक आंकड़ों पर नजर

वित्तीय वर्ष के आंकड़ों को देखें, तो दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार $140.76 बिलियन रहा था। वहीं, अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच भारत ने अमेरिका को $42.8 बिलियन का सामान निर्यात किया। इस टैरिफ के दायरे में इंजीनियरिंग गुड्स, फार्मास्यूटिकल्स, लेदर, टेलीकॉम और कीमती धातुओं से जुड़ी कंपनियां प्रमुख रूप से आती हैं।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव की चेतावनी

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सीधे तौर पर भारत की एनर्जी पॉलिसी को प्रभावित करने की कोशिश है। कंपनियों के लिए इस वक्त सबसे बड़ी समस्या 'ऑपरेशनल अनिश्चितता' है, क्योंकि 30 दिनों के इम्प्लीमेंटेशन विंडो के कारण वे लॉन्ग-टर्म प्राइसिंग और प्रोडक्शन शेड्यूल तय नहीं कर पा रही हैं। निवेशकों को सलाह है कि वे कूटनीतिक बातचीत और सरकार द्वारा मिलने वाली छूट (Exemptions) पर करीबी नजर रखें, क्योंकि यही इस अनिश्चितता को दूर करने का एकमात्र रास्ता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.