भारत की हालिया एक्सपोर्ट सफलता, खासकर स्मार्टफोन शिपमेंट्स में आई तेजी, अब एक नए संकट में है। अमेरिका रूसी एनर्जी खरीदने वाले देशों पर **100%** तक टैरिफ लगाने पर विचार कर रहा है, जो भारत के लिए एक बड़ा रिस्क बन सकता है।
अमेरिका का नया कानून और भारत की चुनौती
अमेरिका ने हाल ही में एक नया कानून पास किया है, जिसके तहत उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है जो रूस से तेल और गैस खरीदते हैं। यह भारत के लिए एक बड़ी मुश्किल है, जो अपनी इकोनॉमिक ग्रोथ बनाए रखने के लिए एक्सपोर्ट स्ट्रैटेजी को लगातार बदल रहा है।
एक्सपोर्ट रिकवरी का इंजन: स्मार्टफोन
साल 2025 के अंत में, भारत ने अमेरिकी ड्यूटी से बचने के लिए अपने एक्सपोर्ट में बड़ा बदलाव किया था। स्मार्टफोन एक्सपोर्ट इसमें सबसे बड़ा ड्राइवर बनकर उभरा, जिसकी वैल्यू $2.2 बिलियन से बढ़कर $5.8 बिलियन पर पहुंच गई। इस अकेले सेक्टर ने कुल एक्सपोर्ट वैल्यू में 72% का योगदान दिया। इसके अलावा, थैरेप्यूटिक सब्सटेंस, ऑप्टिकल फाइबर और एल्युमीनियम ने भी इस रिकवरी में बड़ी भूमिका निभाई है।
एनर्जी सिक्योरिटी बनाम एक्सपोर्ट पॉलिसी
समस्या तब गहरी हुई जब वेस्ट एशिया में सप्लाई चेन बाधित होने के कारण भारत की रूसी क्रूड ऑयल पर निर्भरता बढ़ गई। 2026 के मध्य तक, भारत के कुल तेल आयात में रूसी एनर्जी की हिस्सेदारी 50% से ऊपर निकल गई।
अब भारत के सामने दोहरी चुनौती है: एक तरफ सस्ती रूसी एनर्जी से अपनी जरूरतों को पूरा करना और दूसरी तरफ अमेरिका के कड़े ट्रेड नियमों से अपने एक्सपोर्ट सेक्टर को बचाना। यदि अमेरिका इस नए कानून का उपयोग करता है, तो भारत को अपने एक्सपोर्ट में मिली हालिया बढ़त का नुकसान उठाना पड़ सकता है। निवेशकों के लिए सलाह है कि वे ट्रेड नेगोशिएशन्स और एनर्जी प्रोक्योरमेंट से जुड़े अपडेट्स पर नजर रखें, क्योंकि इनका सीधा असर मैन्युफैक्चरिंग और टेक हार्डवेयर सेक्टर पर पड़ सकता है।
