नई टैरिफ नीति और कानूनी दांव-पेंच
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेस्सेंट ने साफ कर दिया है कि देश जल्द ही अपने अस्थायी यूनिवर्सल टैरिफ को 10% से बढ़ाकर 15% करने वाला है। यह कदम मौजूदा हफ़्ते ही उठाया जा सकता है। यह अस्थायी बढ़ोतरी 150 दिनों के लिए है, लेकिन इसके पीछे अमेरिका की एक बड़ी मंशा है। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद, जिसने पिछली आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए टैरिफ को अमान्य कर दिया था, अब अमेरिका सेक्शन्स 301 और 232 जैसे अधिक मजबूत विधायी शक्तियों का उपयोग करके टैरिफ को फिर से लागू करने की तैयारी कर रहा है। यह कदम दिखाता है कि अमेरिका अपनी ट्रेड पॉलिसी को एक महत्वपूर्ण आर्थिक और भू-राजनीतिक औजार के रूप में इस्तेमाल करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे वैश्विक बाज़ारों में लगातार ट्रेड फ्रिक्शन और पॉलिसी अनिश्चितता बनी रहने की उम्मीद है।
बाज़ार में अस्थिरता और वैश्विक असर
टैरिफ में बढ़ोतरी की संभावना ऐतिहासिक रूप से बाज़ार में अस्थिरता (volatility) का कारण रही है। पिछली बार जब ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ लगाए थे, तब S&P 500 जैसे बड़े इंडेक्स में भारी गिरावट आई थी। हालाँकि बाज़ार अब भी इन झटकों से उबरने में सक्षम हैं, लेकिन इस तरह की नीतिगत घोषणाओं से तुरंत अनिश्चितता बढ़ जाती है। उम्मीद है कि यह घोषणा वैश्विक सप्लाई चेन (supply chain) के पुनर्गठन को तेज करेगी और चीन व यूरोपीय संघ जैसे व्यापारिक साझेदारों को बातचीत या जवाबी कार्रवाई पर विचार करने के लिए प्रेरित कर सकती है। यूरोपीय संघ (EU) पहले ही अमेरिका के साथ अपने व्यापार समझौते की पुष्टि को रोक चुका है, और भारत ने भी कोर्ट के फैसले और उसके बाद की टैरिफ कार्रवाइयों के प्रभाव का अध्ययन करने की आवश्यकता बताते हुए व्यापार वार्ता स्थगित कर दी है।
आर्थिक परिणाम और गहरी चिंताएं
सेक्शन्स 301 (अनुचित व्यापार प्रथाओं) और 232 (राष्ट्रीय सुरक्षा) टैरिफ पर अमेरिका का ध्यान एक अधिक मजबूत, दीर्घकालिक व्यापार प्रवर्तन रणनीति की ओर इशारा करता है। पिछली बार जब टैरिफ लागू किए गए थे, तो इसके महत्वपूर्ण आर्थिक परिणाम सामने आए थे। फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क के एक अध्ययन के अनुसार, नए टैरिफ के बोझ का लगभग 90% अमेरिकी व्यवसायों और परिवारों पर पड़ा, जो प्रभावी रूप से एक घरेलू कर की तरह था। टैरिफ की लागत धीरे-धीरे लेकिन लगातार उपभोक्ता कीमतों में देखी गई, जिसने इंफ्लेशनरी प्रेशर (inflationary pressure) को बढ़ाया। हालाँकि कुछ अनुमानों के अनुसार 2026 तक टैरिफ का दबाव कम हो जाएगा, लेकिन कुछ अन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इसके प्रभाव देरी से दिखेंगे और साल के अंत तक इंफ्लेशन 4% से ऊपर जा सकता है।
अनिश्चितता ही नया सामान्य?
आगे देखते हुए, विश्लेषकों और अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि व्यापार नीति की अनिश्चितता आर्थिक परिदृश्य का एक स्थायी हिस्सा बनी रहेगी। भले ही सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की एकतरफा टैरिफ लगाने की शक्ति को सीमित कर दिया है, लेकिन प्रशासन का सेक्शन्स 301 और 232 की ओर बढ़ना यह दर्शाता है कि वे जांच और लक्षित कार्रवाइयों के माध्यम से व्यापार में उच्च स्तर का तनाव बनाए रखना चाहते हैं। 2026 के लिए की गई भविष्यवाणियों में यह सुझाव दिया गया है कि भले ही जीडीपी ग्रोथ अन्य कारकों से समर्थित हो, लेकिन टैरिफ के मौजूदा प्रभाव और नए व्यापार विवादों की संभावना वैश्विक आर्थिक स्थितियों और इंफ्लेशन के अनुमानों को प्रभावित करती रहेगी।
