यह भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ी खबर है। इस बार **2025-26** के लिए अमेरिका में पढ़ाई के वास्ते आवेदन करने वाले छात्रों की संख्या में **15%** की भारी गिरावट आई है, जो अब तक का सबसे बड़ा落幅 है। नए वीज़ा नियमों के चलते आए इस संकट का असर सीधे भारतीय एड-टेक (ed-tech) और स्टडी-अब्रोड (study-abroad) कंसल्टेंसी फर्मों पर पड़ेगा।
अमेरिका में क्यों घट रहे भारतीय छात्र?
अमेरिकी शिक्षा बाज़ार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। 2025-26 अकादमिक वर्ष के लिए अमेरिकी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्रों के आवेदन 15% तक गिर गए हैं। यह अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे अमेरिका की सख्त इमिग्रेशन नीतियां और पोस्ट-ग्रेजुएशन (post-graduation) के बाद काम करने के अवसरों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता है।
वीज़ा नियमों में बदलाव का असर
यह गिरावट सीधे तौर पर अमेरिकी सरकार के अंतर्राष्ट्रीय छात्र वीज़ा जारी करने के तरीकों में बदलाव के कारण हुई है। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (Department of Homeland Security) ने 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' (Duration of Status) सिस्टम को बंद कर दिया है, जिससे छात्रों को पढ़ाई के दौरान काफी सहूलियत मिलती थी। इसकी जगह अब एक निश्चित एडमिशन पीरियड (admission period) लागू किया गया है, जो आम तौर पर 4 साल तक सीमित है। इस नीतिगत बदलाव के साथ ही, ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (Optional Practical Training) प्रोग्राम के लिए संभावित नई फीस को लेकर चिंताओं ने भी छात्रों के लिए एक अनिश्चित माहौल बना दिया है।
भारतीय कंपनियों पर क्या होगा असर?
भारतीय निवेशकों के लिए यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका सीधा असर देश के एजुकेशन सर्विसेज (education services) सेक्टर पर पड़ेगा। कई भारतीय एड-टेक कंपनियां, टेस्ट प्रेप (test preparation) प्रोवाइडर और ओवरसीज़ एजुकेशन कंसल्टेंट्स (overseas education consultancies) का बड़ा रेवेन्यू (revenue) अमेरिका में डिग्री हासिल करने की चाह रखने वाले छात्रों के एडमिशन कराने से आता है। आवेदनों में 15% की यह लगातार गिरावट दर्शाती है कि आने वाली तिमाहियों में इन व्यवसायों को ग्राहक बढ़ाने और कुल रेवेन्यू ग्रोथ (revenue growth) को लेकर दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
आर्थिक प्रभाव और आगे की राह
आर्थिक तौर पर भी इसके बड़े निहितार्थ हैं। आंकड़ों के अनुसार, 2026 की फॉल टर्म (Fall 2026 term) के लिए अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के एडमिशन में लगभग 1.1 लाख की कमी आ सकती है। छात्र संख्या में इस कमी से अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अंतर्राष्ट्रीय छात्रों का आर्थिक योगदान 41.77 बिलियन डॉलर से घटकर अनुमानित 38.37 बिलियन डॉलर रह सकता है। हालांकि, इसका मुख्य असर अमेरिकी स्थानीय अर्थव्यवस्था पर होगा, लेकिन मांग में यह कमी अंतर्राष्ट्रीय छात्र मोबिलिटी (international student mobility) व्यवसाय में मंदी का शुरुआती संकेत दे रही है।
एजुकेशन और रिक्रूटमेंट (recruitment) स्पेस में निवेशकों को इस ट्रेंड पर नज़र रखनी चाहिए कि क्या यह एक अस्थायी मामला है या छात्र अब यूके, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया या जर्मनी जैसे अन्य देशों को तरजीह दे रहे हैं। स्टडी-अब्रोड (study-abroad) सेवाओं से जुड़ी कंपनियों के आने वाले तिमाही नतीजों पर खास नज़र रखनी होगी, खासकर एप्लीकेशन वॉल्यूम (application volumes), कन्वर्जन रेट्स (conversion rates) और छात्र प्लेसमेंट के अन्य बाज़ारों में विविधीकरण पर। अमेरिका में रेगुलेटरी (regulatory) कसावट या पोस्ट-स्टडी वर्क रूल्स (post-study work rules) में कोई भी और बदलाव इस सेक्टर के लिए एक जोखिम बना रहेगा।
