अमेरिकी बाजारों में आज मंदी का माहौल है, क्योंकि 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड **5.33%** के स्तर पर पहुंच गई है, जो **2002** के बाद सबसे अधिक है। महंगाई की चिंता और **$100** प्रति बैरल के करीब कच्चे तेल की कीमतों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है, वहीं फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में दरें बढ़ाने की **39%** संभावना जताई जा रही है।
बॉन्ड यील्ड और एनर्जी का दोहरा वार
अमेरिकी फाइनेंशियल मार्केट्स के सामने आज बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं। 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड का 5.33% तक पहुंचना कॉरपोरेट और कंज्यूमर दोनों के लिए कर्ज की लागत बढ़ा रहा है। इसके साथ ही, भू-राजनीतिक तनाव (US-Iran tensions) के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल $100 प्रति बैरल के पास बना हुआ है। यह स्थिति न केवल महंगाई को हवा दे रही है, बल्कि फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों को स्थिर करने के काम को और मुश्किल बना रही है।
फेड का रुख और ब्याज दरें
मिनेपोलिस फेड के प्रेसिडेंट नील काशकारी का मानना है कि वर्तमान माहौल में ब्याज दरों के पीक (Peak) का अनुमान लगाना कठिन है। मार्केट में अक्टूबर महीने में फेड द्वारा दरों में बढ़ोतरी की संभावना फिलहाल 39% आंकी जा रही है। अब निवेशकों की नजर आने वाले नॉन-फार्म पेरोल डेटा पर है, जो लेबर मार्केट की स्थिति पर स्पष्टता ला सकता है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कमजोरी
इंस्टीट्यूट फॉर सप्लाई मैनेजमेंट (ISM) का मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स 54.5 पर है। हालांकि यह अभी भी विस्तार के दायरे में है, लेकिन इसमें आई गिरावट औद्योगिक आउटपुट की सुस्ती को दर्शाती है। बढ़ती यील्ड्स के कारण कंपनियों का डेट सर्विंग कॉस्ट (Debt servicing cost) बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर उनके प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
फिलहाल बाजार की दिशा स्टॉक स्पेसिफिक नहीं बल्कि मैक्रो-इकोनॉमिक डेटा से तय हो रही है। आज Nike जैसी दिग्गज कंपनियों के अर्निंग्स रिपोर्ट्स पर सबकी निगाहें टिकी होंगी कि वे इस उच्च ब्याज दर के माहौल में अपने खर्चों को कैसे मैनेज कर रही हैं। जब तक महंगाई में नरमी के स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, तब तक बाजार में अस्थिरता (Volatility) बने रहने के आसार हैं।
