अगस्त 7, 2026 को अमेरिकी शेयर बाज़ारों ने रिकॉर्ड स्तर को छुआ। जुलाई के नॉन-फार्म पेरोल (Non-Farm Payrolls) के आंकड़ों में आई अप्रत्याशित गिरावट ने लेबर मार्केट के ठंडा पड़ने के संकेत दिए। S&P 500 इंडेक्स **7,756.44** पर बंद हुआ, जिससे निवेशकों को उम्मीद जगी है कि फेडरल रिज़र्व (Federal Reserve) ब्याज दरों में बढ़ोतरी रोक सकता है।
क्यों टूटा रिकॉर्ड?
अमेरिकी शेयर बाज़ार में शुक्रवार, अगस्त 7, 2026 को इतिहास रचा गया, जब S&P 500 इंडेक्स 7,756.44 के रिकॉर्ड क्लोजिंग हाई पर बंद हुआ। इस तेजी की मुख्य वजह जुलाई के रोज़गार के आंकड़े रहे, जो उम्मीद से काफी कमजोर आए। बाज़ार के लिए यह एक 'अच्छी खबर' साबित हुई, क्योंकि इससे फेडरल रिज़र्व पर ब्याज दरों को और बढ़ाने का दबाव कम हो गया है।
नौकरियों का आंकड़ा और फेड की चाल
आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में अमरीकी अर्थव्यवस्था से 23,000 नौकरियां कम हुईं, जबकि बाज़ार को 80,000 से 85,000 नई नौकरियों की उम्मीद थी। इससे भी बुरी खबर यह रही कि मई और जून 2026 के हायरिंग (hiring) के आंकड़ों को भी 1,03,000 नौकरियों से घटा दिया गया। इस रिपोर्ट के बाद, सितंबर में फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना घटकर लगभग 40% से 44% रह गई है।
बॉन्ड यील्ड में गिरावट, स्टॉक्स को बूस्ट
इस घटनाक्रम का असर बॉन्ड यील्ड (Bond Yields) पर भी दिखा। जैसे-जैसे लेबर मार्केट के ठंडा पड़ने के संकेत मिले, निवेशक बॉन्ड्स से हटकर शेयरों की ओर बढ़े। 10-साल की ट्रेजरी नोट यील्ड (Treasury note yield) गिरकर करीब 4.64% पर आ गई। आमतौर पर, कम बॉन्ड यील्ड टेक्नोलॉजी और ग्रोथ स्टॉक्स को निवेशकों के लिए ज़्यादा आकर्षक बनाती है। इससे कंपनियों के लिए उधार लेना सस्ता हो जाता है, जो उनके मुनाफे और भविष्य के विस्तार में मदद करता है।
बाज़ार की तेजी के पीछे छिपे खतरे
शेयर बाज़ार भले ही इन आंकड़ों पर खुश हो, लेकिन ये लेबर मार्केट की अंदरूनी कमजोरियों को भी दर्शाते हैं। जुलाई में बेरोज़गारी दर 4.1% तक गिर गई, लेकिन यह नई नौकरियों की वजह से नहीं, बल्कि लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (Labor force participation rate) में आई कमी के कारण हुआ। जब लोग काम की तलाश ही कम करते हैं, तो बेरोज़गारी दर कृत्रिम रूप से कम दिख सकती है। यह आने वाले समय में उपभोक्ता खर्च और कुल मांग को प्रभावित कर सकता है।
इसके अलावा, महंगाई (Inflation) अभी भी एक बड़ी चिंता है। भले ही ब्याज दरों में बढ़ोतरी रुक जाए, लेकिन अगर महंगाई काबू में नहीं आई तो फेडरल रिज़र्व अपनी सख्त मौद्रिक नीति बनाए रख सकता है। अगर लेबर मार्केट बहुत तेज़ी से कमजोर हुआ, तो यह आर्थिक मंदी का संकेत भी हो सकता है।
ग्लोबल फैक्टर और आगे क्या?
वैश्विक बाज़ारों में भी शांति के संकेत दिखे। ईरान और ओमान के बीच संभावित समझौते की खबरों के बाद तेल की कीमतों में नरमी आई। इससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से तेल आपूर्ति में स्थिरता आ सकती है। ऊर्जा की कीमतों में स्थिरता वैश्विक बाज़ार के लिए अच्छी मानी जाती है। निवेशकों की नज़र अब आने वाली महंगाई रिपोर्टों और फेडरल रिज़र्व के अधिकारियों के बयानों पर रहेगी, जो ब्याज दरों और अमरीकी अर्थव्यवस्था की दिशा के बारे में और स्पष्ट संकेत देंगे।
