US Economy: जॉब डेटा में बड़ी गिरावट, Fed के रेट हाईक पर लगा ब्रेक

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
US Economy: जॉब डेटा में बड़ी गिरावट, Fed के रेट हाईक पर लगा ब्रेक

अमेरिका में सितंबर के दौरान केवल **29,000** नई नौकरियां जुड़ी हैं, जो उम्मीदों से कहीं कम हैं। इस सुस्ती के चलते अब बाजार में फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना काफी कम हो गई है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार और करेंसी पर पड़ सकता है।

अमेरिकी लेबर मार्केट में सितंबर 2026 के दौरान बड़ी नरमी देखने को मिली है। इकॉनमी में सिर्फ 29,000 नए जॉब्स जुड़े हैं, जो एनालिस्ट्स के अनुमानों से काफी नीचे हैं। इतना ही नहीं, जुलाई और अगस्त के डेटा को भी 60,000 से नीचे रिवाइज किया गया है, जिससे यह साफ हो गया है कि हायरिंग की रफ्तार उम्मीद से ज्यादा तेजी से ठंडी पड़ रही है। इसके साथ ही बेरोजगारी दर बढ़कर 4.2% हो गई है।

बॉन्ड मार्केट में हलचल

इस डेटा के आते ही बॉन्ड ट्रेडर्स का मूड पूरी तरह बदल गया है। अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की संभावना अब लगभग खत्म हो गई है। इसका असर US ट्रेजरी यील्ड्स पर दिखा, जो हाल ही में मल्टी-ईयर हाइज पर पहुंचने के बाद अब नीचे आ गई हैं।

भारतीय निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?

भारतीय बाजार के लिए यह एक राहत की खबर हो सकती है। अगर फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी को लेकर नरम रुख अपनाता है, तो इससे ग्लोबल लिक्विडिटी बेहतर होती है और भारतीय रुपया (Indian Rupee) पर दबाव कम होता है। ऐसे माहौल में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का रुझान इमर्जिंग मार्केट्स की ओर बढ़ सकता है, जिससे भारतीय शेयरों में लिक्विडिटी का सपोर्ट मिल सकता है।

रिस्क फैक्टर भी है साथ

हालांकि, सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि यह सुस्ती अमेरिकी इकॉनमी में मंदी (Recession) के संकेत भी हो सकती है, जो ग्लोबल डिमांड को कमजोर कर सकती है। फेडरल रिजर्व को अब विकास और महंगाई (Inflation) के बीच एक मुश्किल संतुलन बनाना होगा। निवेशकों की नजर अब फेड के अगले बयानों और नए इन्फ्लेशन डेटा पर टिकी रहेगी कि क्या यह इकॉनमी का सामान्य होना है या फिर एक बड़ी गिरावट की शुरुआत।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.