अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio अगले हफ्ते **200** सदस्यों के बिजनेस डेलीगेशन के साथ भारत आ रहे हैं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य डिफेंस, टेक और एनर्जी सेक्टर में सहयोग बढ़ाना है। वे जामनगर रिफाइनरी का दौरा भी करेंगे, जो दोनों देशों के बीच एनर्जी पार्टनरशिप का बड़ा केंद्र है।
अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio की अगले हफ्ते की भारत यात्रा द्विपक्षीय संबंधों में एक बड़े बदलाव का संकेत है। इस यात्रा में 200 से ज्यादा बिजनेस लीडर्स का शामिल होना यह बताता है कि अमेरिका अब केवल सरकारी स्तर पर ही नहीं, बल्कि प्राइवेट सेक्टर के जरिए भी भारत के साथ गहरी साझेदारी चाहता है। दिसंबर में होने वाली प्रधानमंत्री Narendra Modi और राष्ट्रपति Donald Trump की समिट से पहले यह दौरा दोनों देशों की सप्लाई चेन और सुरक्षा ढांचे को एक नई दिशा दे सकता है।
एनर्जी सेक्टर पर दांव
इस दौरे का मुख्य आकर्षण Reliance Industries का जामनगर रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स है। यह रिफाइनरी रोजाना 1.4 मिलियन बैरल कच्चे तेल का प्रसंस्करण करती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, Reliance की टेक्सास में एक बड़ी रिफाइनिंग परियोजना में भागीदारी की संभावना है, जिस पर बाजार के जानकारों की पैनी नजर है। अगर यह प्रोजेक्ट आगे बढ़ता है, तो Reliance का ग्लोबल फुटप्रिंट काफी मजबूत होगा।
डिफेंस में बढ़ता सहयोग
डिफेंस सेक्टर में भारत-अमेरिका के बीच सहयोग 'तरंग शक्ति' (Tarang Shakti) अभ्यास और F-35 फाइटर जेट्स के सफल ऑपरेशंस के बाद और गहरा हुआ है। इस बार के डेलीगेशन का फोकस केवल हथियारों की खरीद पर नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और जॉइंट प्रोडक्शन पर है। भारतीय डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरर्स के लिए यह एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है।
ट्रेड और टैरिफ की चुनौतियां
हालांकि माहौल सकारात्मक है, लेकिन टैरिफ और व्यापार बाधाओं पर बातचीत अभी भी जारी है। विदेश मंत्री S. Jaishankar के अनुसार, ट्रेड वार्ता अब एक निर्णायक मोड़ पर है। दिसंबर में फ्लोरिडा में होने वाली G20 समिट से पहले Rubio की यह यात्रा तय करेगी कि इन समझौतों को अंतिम रूप कैसे दिया जाए। निवेशकों को उन कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जो US-India एक्सपोर्ट-इंपोर्ट कॉरिडोर पर निर्भर हैं।
