H-1B वीज़ा: अमेरिका में नौकरी छूटने पर मिलने वाली 60 दिन की छूट खत्म हो सकती है, भारतीय पेशेवरों पर असर

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
H-1B वीज़ा: अमेरिका में नौकरी छूटने पर मिलने वाली 60 दिन की छूट खत्म हो सकती है, भारतीय पेशेवरों पर असर

अमेरिकी सरकार H-1B वीज़ा होल्डर्स के लिए नौकरी जाने के बाद मिलने वाली 60 दिन की ग्रेस पीरियड (Grace Period) को खत्म करने पर विचार कर रही है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो प्रभावित कर्मचारियों को तुरंत देश छोड़ना पड़ सकता है, जिसका असर हजारों भारतीय नागरिकों पर पड़ेगा और भारतीय IT कंपनियों के लिए नई परेशानियां खड़ी हो सकती हैं।

अमेरिकी सरकार का बड़ा कदम: H-1B वीज़ा पर नया नियम?

अमेरिकी सरकार विदेशियों के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव पर गौर कर रही है, जिसका असर H-1B, L-1 और O-1 जैसे नॉन-इमिग्रेंट वीज़ा पर काम कर रहे प्रोफेशनल्स पर पड़ सकता है। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) एक प्रस्ताव (RIN: 1615-AD22) की समीक्षा कर रहा है, जिसका मकसद H-1B वीज़ा धारकों के लिए नौकरी छूटने के बाद मिलने वाली 60 दिन की ग्रेस पीरियड को खत्म करना है। वर्तमान नियम के तहत, वीज़ा होल्डर्स को नौकरी जाने के बाद नए रोज़गार की तलाश करने, वीज़ा स्टेटस बदलने या देश छोड़ने की व्यवस्था करने के लिए दो महीने तक का समय मिलता है।

भारतीय प्रोफेशनल्स और IT सेक्टर पर क्या होगा असर?

यह संभावित बदलाव भारतीय टेक वर्कर्स के लिए काफी मायने रखता है। ऐतिहासिक रूप से, भारतीय नागरिक H-1B वीज़ा पाने वालों में सबसे बड़े समूह रहे हैं, जो 2024 के फाइनेंशियल ईयर में सफल आवेदकों का लगभग 71% थे। इन प्रोफेशनल्स के लिए, मौजूदा ग्रेस पीरियड इंडस्ट्री में मंदी या प्रोजेक्ट खत्म होने के दौरान एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच का काम करता है।

व्यावसायिक दृष्टिकोण से, इस बदलाव से अमेरिका में बड़े पैमाने पर काम कर रही भारतीय IT सर्विस कंपनियों के लिए नई चुनौतियाँ पैदा हो सकती हैं। वर्तमान में, कंपनियाँ इस ट्रांज़िशन पीरियड का इस्तेमाल अपने वर्कफ़ोर्स को मैनेज करने के लिए करती हैं, जिसमें कर्मचारियों का ट्रांसफर या आंतरिक पुनः-तैनाती शामिल है। अगर ग्रेस पीरियड खत्म हो जाता है, तो कंपनियों पर लेऑफ और वीज़ा ट्रांसफर को तुरंत निपटाने का दबाव बढ़ सकता है, जिससे मांग में उतार-चढ़ाव के दौरान टैलेंट रिटेंशन और बेंच स्ट्रेंथ को मैनेज करने की उनकी फ्लेक्सिबिलिटी सीमित हो सकती है। हालाँकि यह प्रस्ताव अभी भी समीक्षा के दौर में है, लेकिन सख्त इमिग्रेशन नियमों की संभावना टेक्नोलॉजी और आउटसोर्सिंग सेक्टर की कंपनियों के लिए मौजूदा अस्थिरता को और बढ़ा सकती है।

नियम की वर्तमान स्थिति

यह प्रस्ताव वर्तमान में व्हाइट हाउस ऑफिस ऑफ मैनेजमेंट एंड बजट (OMB) के अधीन समीक्षा में है, जिसका अर्थ है कि यह अभी तक कानून या आधिकारिक नीति नहीं बना है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि यह प्रक्रिया तुरंत नहीं होगी। एक बार जब प्रस्ताव फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित हो जाएगा, तो यह एक सार्वजनिक कमेंट पीरियड शुरू करेगा, जो आमतौर पर 30 से 60 दिनों तक चलता है। इस दौरान, व्यवसाय, उद्योग समूह और व्यक्ति इस नियम के संभावित आर्थिक और परिचालन संबंधी परिणामों पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं।

निवेशकों और प्रोफेशनल्स को फेडरल रजिस्टर में इस नियम के आधिकारिक प्रकाशन पर नज़र रखनी चाहिए, जो सार्वजनिक टिप्पणी चरण की शुरुआत का संकेत देगा। अंतिम निर्णय इस अवधि के दौरान प्राप्त प्रतिक्रियाओं और उसके बाद के सरकारी विचार-विमर्श पर निर्भर करेगा। तब तक, 60-दिन की ग्रेस पीरियड से संबंधित मौजूदा नियम प्रभावी रहेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.