US Immigration Update: ट्रंप सरकार के 18 महीनों में 9.8 लाख डिपोर्टेशन, भारतीय IT कंपनियों पर बड़ा संकट

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
US Immigration Update: ट्रंप सरकार के 18 महीनों में 9.8 लाख डिपोर्टेशन, भारतीय IT कंपनियों पर बड़ा संकट

ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल के पहले 18 महीनों में अमेरिका ने **9,80,000** लोगों को डिपोर्ट किया है और **3,00,000** से ज्यादा वीजा रद्द किए हैं। इस सख्ती का असर भारतीय IT सेक्टर और वर्कफोर्स पर पड़ने की आशंका है।

अमेरिकी सरकार ने अपने इमिग्रेशन नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए बेहद सख्त रुख अपनाया है। माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के अनुसार, डिपोर्ट किए गए 80% लोगों का कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं था, जो पहले की नीतियों से एक बड़ा विचलन है।

एनफोर्समेंट का दायरा

प्रशासन ने मुख्य रूप से 9,80,000 डिपोर्टेशन किए हैं, जिनमें 5,80,000 सीधे रिमूवल (Removals) हैं, जो कुल कार्रवाई का 59% हिस्सा है। इसके अलावा, 3,00,000 एनफोर्समेंट रिटर्न्स और 1,10,000 एडमिनिस्ट्रेटिव रिटर्न्स शामिल हैं। इन ऑपरेशंस को U.S. Immigration and Customs Enforcement और Customs and Border Protection जैसी एजेंसियों द्वारा अंजाम दिया गया है।

भारतीय IT सेक्टर के लिए चिंता

भारतीय IT कंपनियां बड़े पैमाने पर H-1B और L-1 वीजा धारकों पर निर्भर हैं। वीजा रद्द होने की बढ़ती संख्या और कड़ी स्क्रूटनी से इन कंपनियों के लिए टैलेंट मैनेजमेंट और प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करना मुश्किल हो सकता है। साथ ही, इससे कंप्लायंस कॉस्ट (Compliance Cost) भी बढ़ सकती है।

वर्तमान में, इन निर्णयों को लेकर फेडरल कोर्ट्स में कई कानूनी चुनौतियां चल रही हैं। निवेशक और मार्केट एक्सपर्ट्स अब इस पर नजर टिकाए हुए हैं कि क्या न्यायपालिका का दखल वीजा नियमों में कोई राहत देगा या फिर वर्क-बेस्ड वीजा नॉर्म्स और ज्यादा सख्त हो जाएंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.