US की अर्थव्यवस्था में तीसरी तिमाही के दौरान **3%** से **3.4%** की तेजी दर्ज की गई है। इस ग्रोथ के पीछे मुख्य वजह AI इंफ्रास्ट्रक्चर में **10.2%** का भारी निवेश है। हालांकि, गिरती कंज्यूमर स्पेंडिंग और बढ़ता ट्रेड डेफिसिट बाजार के लिए नई चुनौती बन रहे हैं, जिसका सीधा असर भारतीय IT सेक्टर और FII निवेश पर पड़ेगा।
ग्रोथ का इंजन: AI निवेश
वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में US अर्थव्यवस्था ने जबरदस्त रफ्तार पकड़ी है। दूसरी तिमाही की 2.2% ग्रोथ के मुकाबले, इस बार आंकड़ा 3% से 3.4% के बीच रहा है। इस तेजी का सबसे बड़ा कारण बिजनेस फिक्स्ड इन्वेस्टमेंट में आया 10.2% का उछाल है। एक्सपर्ट्स इसे 1990 के दशक के इंटरनेट बूम से तुलना कर रहे हैं, क्योंकि कंपनियां AI में अपनी बढ़त बनाए रखने के लिए भारी पैसा खर्च कर रही हैं।
निवेशक क्यों हैं सतर्क?
तेजी के बीच कुछ चिंताजनक आंकड़े भी सामने आए हैं। कंज्यूमर खर्च, जो पहले 3.8% था, घटकर 3.4% पर आ गया है। अनुमान है कि चौथी तिमाही में यह 1.5% तक गिर सकता है, क्योंकि महंगाई और ऊर्जा की बढ़ती कीमतें आम लोगों का बजट बिगाड़ रही हैं। इसके अलावा, सितंबर में ट्रेड डेफिसिट $135 बिलियन तक पहुंच गया है, जो आर्थिक ग्रोथ के लिए एक बड़ा झटका है।
भारत पर इसका असर (The Indian Angle)
भारतीय निवेशकों को इस डेटा पर नजर रखना जरूरी है क्योंकि इसके तीन बड़े असर हो सकते हैं:
- IT सेक्टर की डिमांड: US में AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च का मतलब है भारतीय IT कंपनियों के लिए नए प्रोजेक्ट्स और अवसरों का खुलना।
- रुपया और डॉलर: मजबूत US डेटा डॉलर को और मजबूती दे सकता है, जिससे भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।
- FII और फेडरल रिजर्व: अगर US की ग्रोथ मजबूत बनी रहती है, तो फेडरल रिजर्व ब्याज दरों (Interest Rates) को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है। इससे भारतीय बाजार से FII का पैसा वापस जाने का जोखिम बना रहता है।
अब बाजार की नजरें US के अगले महंगाई आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के बयानों पर टिकी हैं, जो तय करेंगे कि आने वाले समय में ग्लोबल मार्केट का रुख कैसा होगा।
