US ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने World Bank से ऑयल और गैस प्रोजेक्ट्स पर लगी पाबंदी हटाने की मांग की है। इस कदम का मकसद विकासशील देशों में एनर्जी सिक्योरिटी और इंडस्ट्रियल ग्रोथ को बढ़ावा देना है।
US ट्रेजरी ने आधिकारिक तौर पर World Bank से मांग की है कि वह अपस्ट्रीम ऑयल और गैस प्रोजेक्ट्स की फंडिंग पर लगी दशकों पुरानी रोक को खत्म करे। वाशिंगटन का तर्क है कि विकासशील देशों में गरीबी मिटाने और औद्योगीकरण के लिए सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा अनिवार्य है। अब अमेरिका चाहता है कि बैंक अपनी 'क्लाइमेट-फोकस्ड' कठोर नीतियों को छोड़कर ऐसे प्रोजेक्ट्स पर ध्यान दे, जिनसे मापने योग्य विकास (measurable development) हो सके।
30 करोड़ लोगों तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य
इस प्रस्ताव का मुख्य केंद्र अफ्रीका जैसे क्षेत्र हैं, जहां 30 करोड़ लोगों तक बिजली पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। अमेरिका का मानना है कि नेचुरल गैस इंफ्रास्ट्रक्चर के बिना इस लक्ष्य को हासिल करना असंभव है। इसके अलावा, अमेरिका न्यूक्लियर एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए 'Nuclear Energy Assistance Trust Fund' में भी शुरुआती योगदान दे चुका है।
वर्ल्ड बैंक और IMF में बड़े बदलाव की तैयारी
सिर्फ एनर्जी पॉलिसी ही नहीं, बल्कि अमेरिका वर्ल्ड बैंक ग्रुप में संस्थागत सुधार भी चाहता है। सेक्रेटरी Scott Bessent ने चीन और पोलैंड जैसे आर्थिक रूप से परिपक्व देशों के लिए सॉवरेन लेंडिंग (sovereign lending) को धीरे-धीरे बंद करने का सुझाव दिया है, ताकि सीमित संसाधन उन देशों को मिल सकें जिन्हें इसकी ज्यादा जरूरत है।
साथ ही, IMF पर भी दबाव बढ़ाया गया है। अमेरिका चाहता है कि ग्लोबल डेट (debt) और एक्सचेंज-रेट नीतियों की सख्त निगरानी हो। निवेशकों के लिए यह खबर काफी अहम है, क्योंकि इन वैश्विक संस्थाओं की फंडिंग गाइडलाइन्स बदलने से इमर्जिंग मार्केट्स में कैपिटल फ्लो और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के मायने पूरी तरह बदल सकते हैं।
