U.S. Department of Homeland Security ने नए H-1B वीजा आवेदनों पर **$1,03,265** की भारी-भरकम फीस लगाने का प्रस्ताव रखा है। इस फैसले का असर भारतीय IT सेक्टर के उन बिजनेस मॉडल्स पर पड़ सकता है जो अमेरिका में ऑनसाइट टैलेंट पर निर्भर हैं।
IT सेक्टर पर पड़ेगा असर
अमेरिकी प्रशासन के इस प्रस्ताव ने भारतीय IT इंडस्ट्री की चिंता बढ़ा दी है। यह फीस केवल 'new cap-subject' H-1B आवेदनों पर लागू होगी। अच्छी बात यह है कि जो लोग पहले से अमेरिका में काम कर रहे हैं या जिनके वीजा रिन्यू होने हैं, उन पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। लेकिन, जो कंपनियां अपने अमेरिका स्थित ऑपरेशंस को बड़ा करने की योजना बना रही हैं, उनके लिए यह एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।
क्यों बदलेगा बिजनेस मॉडल?
भारतीय IT कंपनियां लंबे समय से 'ऑनसाइट-ऑफशोर' मॉडल पर काम करती आई हैं। अगर यह नियम लागू हुआ, तो कंपनियों को अपनी स्ट्रैटेजी बदलनी पड़ सकती है। कंपनियां अब अमेरिका में लोकल हायरिंग को बढ़ावा दे सकती हैं या फिर अपने काम को भारत में शिफ्ट (offshore) कर सकती हैं ताकि बढ़ते खर्चों को कम किया जा सके।
कानूनी चुनौतियां और आगे का रास्ता
याद रखें कि यह अभी सिर्फ एक प्रस्ताव है और 24 सितंबर, 2026 तक इस पर पब्लिक कमेंट लिए जाएंगे। इससे पहले भी अमेरिका में $1,00,000 की फीस का प्रस्ताव आया था, जिसे फेडरल कोर्ट्स ने रोक दिया था। इस बार प्रशासन इसे रेगुलर चैनल से ला रहा है, ताकि कानूनी अड़चनों से बचा जा सके। निवेशक फिलहाल कंपनियों की तरफ से आने वाली आधिकारिक अपडेट्स और लीगल लड़ाई की संभावनाओं पर नजर बनाए हुए हैं।
