US National Debt: $40 ट्रिलियन के पार पहुंचा कर्ज़, भारत पर भी पड़ेगा असर!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
US National Debt: $40 ट्रिलियन के पार पहुंचा कर्ज़, भारत पर भी पड़ेगा असर!

अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज़ एक बार फिर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। देश का कुल कर्ज़ **$40 ट्रिलियन** का आंकड़ा पार कर गया है, जो कि पिछले **$39 ट्रिलियन** के आंकड़े के महज़ 5 महीने बाद हुआ है। सालाना **$2 ट्रिलियन** से ज़्यादा के बजट घाटे और बढ़ते ब्याज भुगतान के चलते कर्ज़ तेज़ी से बढ़ रहा है। इसका असर ग्लोबल बॉन्ड यील्ड्स (Global Bond Yields) पर भी दिख रहा है, जो भारत जैसे उभरते बाज़ारों में पूंजी प्रवाह (Capital Flows) को प्रभावित कर सकता है।

अमेरिका के कर्ज़ में तेज़ी का कारण

अमेरिकी ट्रेजरी (US Treasury) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज़ अब $40.047 ट्रिलियन के पार पहुँच गया है। यह कर्ज़ पिछले महज़ 5 महीनों में $1 ट्रिलियन बढ़ा है, जो कि इसकी तेज़ रफ़्तार वृद्धि को दर्शाता है। इस बढ़ोतरी के पीछे मुख्य वजह सालाना $2 ट्रिलियन से अधिक का लगातार बना हुआ बजट घाटा (Budget Deficit) और $1 ट्रिलियन प्रति वर्ष से अधिक पहुँच चुका ब्याज भुगतान (Interest Payment) है।

ग्लोबल बाज़ारों और भारतीय निवेशकों पर असर

अमेरिका की आर्थिक स्थिति का सीधा असर ग्लोबल वित्तीय स्थिरता (Global Financial Stability) और ब्याज दरों (Interest Rates) पर पड़ता है। जब अमेरिकी सरकार बड़े पैमाने पर उधार लेती है, तो यह ग्लोबल बॉन्ड यील्ड्स को प्रभावित करती है। यदि ये यील्ड्स फिस्कल चिंताओं के कारण ऊँची बनी रहती हैं, तो इसका असर भारत जैसे उभरते बाज़ारों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के व्यवहार पर पड़ सकता है। अक्सर, आकर्षक यील्ड्स मिलने पर ग्लोबल निवेशक सुरक्षित संपत्तियों (Safe-haven Assets) की ओर रुख करते हैं, जिससे भारतीय इक्विटी (Indian Equities) में निवेश के प्रवाह में बदलाव आ सकता है। इसके अलावा, अमेरिकी फिस्कल हेल्थ और डॉलर के मूल्य में उतार-चढ़ाव का असर ग्लोबल कमोडिटी की कीमतों और आयात लागत पर भी पड़ सकता है, जो घरेलू महंगाई (Domestic Inflation) को प्रभावित कर सकता है।

फिस्कल चुनौतियां और आगामी समय-सीमा

मौजूदा कर्ज़ की रफ़्तार पर बारीकी से नज़र रखी जा रही है, क्योंकि सालाना ब्याज भुगतान संघीय सरकार के सबसे बड़े खर्चों में से एक बन गया है। कर्ज़ के तेज़ी से बढ़ने के साथ, संघीय खर्चों को राजस्व के मुकाबले संतुलित करने का दबाव एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। यह फिस्कल स्थिति आगामी विधायी समय-सीमाओं (Legislative Deadlines) से भी जुड़ी हुई है।

निवेशक अमेरिकी सरकार की अल्पकालिक फिस्कल ज़रूरतों को प्रबंधित करने की क्षमता पर नज़र रखेंगे, जिसमें 30 सितंबर, 2026 की समय-सीमा से पहले यदि नया खर्च विधेयक पारित नहीं होता है तो संभावित सरकारी शटडाउन (Government Shutdown) का जोखिम भी शामिल है। इसके अलावा, देश अपने वैधानिक कर्ज़ सीमा (Statutory Debt Limit) $41.1 ट्रिलियन की ओर बढ़ रहा है। विश्लेषकों का अनुमान है कि यह सीमा 2027 की शुरुआत तक पहुँच सकती है, जिसके लिए सीमा को बढ़ाने या निलंबित करने हेतु कांग्रेस (Congress) की और कार्रवाई की आवश्यकता होगी। कर्ज़ के इस पथ की स्थिरता आने वाली तिमाहियों में ग्लोबल वित्तीय ट्रैकिंग (Global Financial Tracking) के लिए एक प्रमुख विषय बनी रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.