US National Debt: अमेरिका का कर्ज **$40 ट्रिलियन** के पार, क्या भारतीय बाजार पर मंडरा रहा है खतरा?

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
US National Debt: अमेरिका का कर्ज **$40 ट्रिलियन** के पार, क्या भारतीय बाजार पर मंडरा रहा है खतरा?

अमेरिका का नेशनल डेट पहली बार **$40 ट्रिलियन** के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गया है। इस रिकॉर्ड कर्ज के कारण ट्रेजरी यील्ड **2007** के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है, जिससे भारतीय निवेशकों के लिए डॉलर का दबाव और FII के बाहर जाने का जोखिम बढ़ गया है।

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका पर कर्ज का बोझ अब $40 ट्रिलियन के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया है। इस भारी कर्ज के चलते ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट्स में हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स की यील्ड बढ़कर 5.3% के आसपास पहुंच गई है, जो कि 2007 के बाद का उच्चतम स्तर है।

भारतीय निवेशकों पर क्या होगा असर?

जब अमेरिकी सरकारी बॉन्ड्स पर रिटर्न बढ़ता है, तो ग्लोबल निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए अमेरिका का रुख करते हैं। इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ता है। FII यानी विदेशी संस्थागत निवेशकों का पैसा भारतीय बाजार से निकलकर अमेरिकी डॉलर-डिनोमिनेटेड एसेट्स में जा सकता है, जिससे घरेलू इंडेक्स में भारी वोलैटिलिटी (Volatility) देखने को मिल सकती है।

रुपया और महंगाई का कनेक्शन

अमेरिकी डॉलर की बढ़ती मांग भारतीय रुपये पर दबाव डाल रही है। रुपये में कमजोरी से भारत का आयात महंगा हो जाएगा, जो विशेष रूप से उन कंपनियों के लिए नुकसानदायक है जो विदेश से कच्चा माल (Raw Material) मंगाती हैं या जिन पर विदेशी मुद्रा में कर्ज है। इससे देश में महंगाई का खतरा भी बढ़ सकता है।

गंभीर होती आर्थिक स्थिति

आंकड़ों पर गौर करें तो अमेरिका का डेट-टू-जीडीपी रेशियो 125% तक पहुंच चुका है। चिंता की बात यह है कि इस कर्ज का ब्याज चुकाना अब अमेरिकी बजट का सबसे बड़ा हिस्सा बन गया है, जो कि देश के डिफेंस बजट से भी ज्यादा है। हर साल का फिस्कल डेफिसिट $2 ट्रिलियन से ऊपर बना हुआ है, जिसे लेकर अर्थशास्त्रियों में लंबी बहस जारी है।

आगे क्या करें निवेशक?

ग्लोबल स्तर पर बढ़ती लिक्विडिटी की तंगी और अमेरिकी ब्याज दरों की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। भारतीय निवेशकों को अब FII की बिकवाली के आंकड़ों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की पॉलिसी अपडेट्स पर पैनी नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये संकेत ही आने वाले महीनों में भारतीय बाजार की दिशा तय करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.