अमेरिका में 30-साल का फिक्स्ड मॉर्गेज रेट बढ़कर **7.12%** पर पहुंच गया है, जो मई 2024 के बाद का उच्चतम स्तर है। इस उछाल से अमेरिकी रियल एस्टेट की मांग सुस्त पड़ रही है, जो भारतीय निवेशकों के लिए एक चिंता का विषय है क्योंकि इससे ग्लोबल मार्केट सेंटीमेंट और लिक्विडिटी प्रभावित हो सकती है।
अमेरिका में होम लोन की ब्याज दरें तेजी से बढ़ रही हैं। 18 सितंबर को समाप्त हुए सप्ताह में 30-साल का फिक्स्ड मॉर्गेज रेट 15 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर 7.12% हो गया है। हालांकि 5-साल के एडजस्टेबल-रेट मॉर्गेज में 6.1% तक की मामूली गिरावट देखी गई है, लेकिन कुल मिलाकर घर खरीदारों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
बाजार पर असर
मॉर्गेज बैंकर्स एसोसिएशन के डेटा के मुताबिक, बढ़ती दरों का असर खरीदारों के व्यवहार पर साफ दिख रहा है। घर खरीदने के लिए एप्लिकेशन 0.8% घटकर 4-हफ्ते के निचले स्तर पर आ गई हैं। वहीं, रीफाइनेंसिंग गतिविधियों में 2.6% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जो फरवरी 2025 के बाद सबसे कम है। 7% के मानसिक स्तर (Psychological barrier) को पार करने के बाद खरीदार बाजार से दूर होते दिख रहे हैं।
कंस्ट्रक्शन सेक्टर की मुश्किलें
आवास और निर्माण क्षेत्र में भी इसका असर दिखाई दे रहा है। हाई कैपिटल कॉस्ट और महंगाई के कारण बिल्डर्स का कॉन्फिडेंस काफी कम है। लेबर मार्केट भी दबाव में है और महंगी उधारी के चलते नए सप्लाई में कमी आ रही है, जो रेजिडेंशियल रियल एस्टेट के लिए एक कठिन चक्र बनाता जा रहा है।
भारतीय निवेशकों के लिए संकेत
भारतीय मार्केट पार्टिसिपेंट्स के लिए मॉर्गेज रेट्स का बढ़ना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इनका सीधा कनेक्शन अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड से होता है। जब यील्ड बढ़ती है, तो निवेशकों को लगता है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखेगा।
इसका सीधा मतलब यह है कि ग्लोबल लेवल पर अमेरिकी एसेट्स ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं, जिससे विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजारों से पैसा निकालकर वहां शिफ्ट कर सकते हैं। इसके अलावा, अमेरिका में खपत घटने से वहां के क्लाइंट्स पर निर्भर भारतीय IT कंपनियों के ऑर्डर बुक पर भी असर पड़ सकता है। अब निवेशकों की नजरें अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की कमेंट्री पर टिकी हैं।
