साल 2024 से अब तक S&P 500 में आई कुल तेजी का **67%** हिस्सा महज 42 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनियों के नाम रहा है। मार्केट भले ही रिकॉर्ड हाई पर हो, लेकिन बाजार की यह सीमित बढ़त निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है।
बाजार की तस्वीर और हकीकत
अक्टूबर 2026 की शुरुआत में S&P 500 ने 7,818.93 के रिकॉर्ड स्तर को छुआ, लेकिन यह चमक पूरे बाजार की नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक, मार्केट की कुल अर्निंग ग्रोथ का 58% हिस्सा भी इन्हीं 42 कंपनियों से आ रहा है। फिलहाल स्थिति यह है कि S&P 500 के कुल शेयरों में से केवल 29% से 40% ही इंडेक्स को आउटपरफॉर्म कर पा रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि बाकी कंपनियां तेजी की इस दौड़ में काफी पीछे छूट गई हैं। मार्केट के जानकारों का मानना है कि यह स्थिति साल 2000 के डॉट-कॉम बबल जैसी है।
AI लीडरशिप की भारी कीमत
AI रेस में बने रहने के लिए कंपनियां अंधाधुंध पैसा खर्च कर रही हैं। S&P 500 की कुल रिसर्च और एक्सपेंशन स्पेंडिंग का 81% हिस्सा इन्हीं 42 कंपनियों का है। साल 2026 में ही बड़ी टेक कंपनियां AI इन्फ्रास्ट्रक्चर पर $700 अरब से $800 अरब के बीच निवेश करने वाली हैं। यह भारी-भरकम खर्च ज्यादातर कर्ज या कैश रिजर्व का इस्तेमाल करके किया जा रहा है, जिससे कंपनियों की बैलेंस शीट पर दबाव बढ़ रहा है।
निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?
बाजार का पूरा दारोमदार चंद कंपनियों पर टिकना एक बड़ा रिस्क है। यदि AI सेक्टर की डिमांड में कोई बदलाव आता है या नियामक (Regulatory) बाधाएं बढ़ती हैं, तो इसका असर पूरे इंडेक्स पर पड़ेगा। निवेशकों की नजर अब आने वाली अर्निंग रिपोर्ट्स पर है। अगर ये कंपनियां अपने भारी निवेश के मुकाबले मुनाफे (Profit) की रफ्तार नहीं दिखा पाईं, तो बाजार में एक बड़ा करेक्शन देखने को मिल सकता है, क्योंकि मार्केट का अभी का वैल्युएशन पूरी तरह से भविष्य के मुनाफे पर टिका है।
