US Market Crisis: जंक बॉन्ड की यील्ड **18%** पर पहुंची, **$225 बिलियन** का कर्ज बना मुसीबत

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
US Market Crisis: जंक बॉन्ड की यील्ड **18%** पर पहुंची, **$225 बिलियन** का कर्ज बना मुसीबत

अमेरिका में सबसे निचले दर्जे के कॉर्पोरेट कर्ज पर यील्ड उछलकर **18%** हो गई है, जो डिफॉल्ट के बढ़ते खतरे का संकेत है। मार्केट में **$225 बिलियन** से ज्यादा का 'डिस्ट्रेस्ड डेट' मौजूद है, जिससे कंपनियों के लिए रिफाइनेंसिंग करना मुश्किल हो गया है।

रिफाइनेंसिंग की चुनौती

वर्तमान दबाव मुख्य रूप से 2020 से 2022 के बीच लिए गए कर्ज की मैच्योरिटी के कारण है। उस दौरान जब ब्याज दरें कम थीं, तो कंपनियों ने भारी कर्ज लिया था। अब जैसे-जैसे यह कर्ज चुकाने का समय आ रहा है, इन फर्मों को ऐसी बाजार स्थिति में रिफाइनेंस करना पड़ रहा है जहां लेंडर जोखिम के बदले बहुत ज्यादा रिटर्न मांग रहे हैं। इससे एक ऐसा चक्र बन गया है जहां कम कैश फ्लो वाली कंपनियों के लिए नया फंड जुटाना लगभग नामुमकिन होता जा रहा है, जिससे डिफॉल्ट या इमरजेंसी रिस्ट्रक्चरिंग का खतरा पैदा हो गया है।

सॉफ्टवेयर, हेल्थकेयर, इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग और हाउसिंग जैसे सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में हैं। इन उद्योगों को कामकाज जारी रखने के लिए लगातार क्रेडिट की जरूरत होती है, जिससे वे लिक्विडिटी में किसी भी तरह की कमी के प्रति बेहद संवेदनशील हो गए हैं।

ग्लोबल मार्केट पर असर

भारतीय निवेशकों के लिए, अमेरिका के क्रेडिट बाजार का यह तनाव वैश्विक जोखिम लेने की क्षमता (Risk Appetite) का एक प्रमुख संकेत है। जब अमेरिका में जोखिम भरे एसेट्स के लिए उधार लेना महंगा हो जाता है, तो अक्सर वैश्विक लिक्विडिटी टाइट हो जाती है। यह 'रिस्क-ऑफ' माहौल पैदा करता है, जहां विदेशी निवेशक इमर्जिंग मार्केट्स से पैसा निकालकर सुरक्षित एसेट्स की ओर भागते हैं। हालांकि इसका असर भारतीय शेयरों पर तुरंत नहीं दिखेगा, लेकिन यह विदेशी निवेशकों के निवेश के पैटर्न में बदलाव ला सकता है और बाजार में अस्थिरता बढ़ा सकता है।

निवेशकों के लिए क्या है जरूरी?

मार्केट पार्टिसिपेंट्स अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि ये कंपनियां अपना कर्ज कैसे चुकाती हैं। क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने पहले ही इन खतरों के प्रति चेतावनी जारी कर दी है। निवेशकों को US सेंट्रल बैंक की पॉलिसी और क्रेडिट स्प्रेड डेटा पर बारीक नजर रखने की जरूरत है, क्योंकि यही ग्लोबल बॉन्ड मार्केट में लिक्विडिटी के असली ड्राइवर हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.