अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अगस्त के दौरान **162,000** नई नौकरियां जुड़ी हैं, जो उम्मीदों से काफी ज्यादा है। इस मजबूत आंकड़े ने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका को बढ़ा दिया है, जिसका असर भारतीय बाजार और रुपये की चाल पर पड़ सकता है।
बाजार की चिंता का कारण
अमेरिकी श्रम विभाग (US Labor Department) के ताजा आंकड़ों ने बाजार में खलबली मचा दी है। अगस्त में 162,000 नई नौकरियां पैदा हुईं, जबकि अनुमान सिर्फ 65,000 का था। साथ ही, पिछले महीनों के आंकड़ों में 55,000 और नौकरियां जोड़ी गईं, जिससे साफ है कि अमेरिकी इकोनॉमी तेजी से रिकवर कर रही है। अब 16 सितंबर की फेड पॉलिसी मीटिंग में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना बढ़कर 60% तक पहुंच गई है।
भारतीय निवेशकों के लिए रिस्क
जब अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो डॉलर मजबूत होता है। इसका सीधा असर भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स पर पड़ता है क्योंकि विदेशी निवेशक (FIIs) अपना पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड्स में लगाने लगते हैं। साथ ही, डॉलर के मजबूत होने से रुपया कमजोर होता है, जिससे भारत के लिए तेल का इंपोर्ट महंगा हो जाता है और देश में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है।
कच्चे तेल की आग
इस समय ब्रेंट क्रूड $95.37 प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा है। अमेरिका-ईरान तनाव के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सप्लाई चेन बाधित है, जो तेल की कीमतों को आसमान पर ले जा रही है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, इसलिए लॉजिस्टिक और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के मार्जिन पर भारी दबाव दिख रहा है।
मार्केट का मिला-जुला रिएक्शन
अमेरिकी बाजारों में शुक्रवार को बिकवाली देखी गई, लेकिन Nvidia और Advanced Micro Devices जैसे टेक शेयरों ने मजबूती दिखाई। वहीं, दूसरी ओर Lululemon Athletica के शेयर 17% तक गिर गए क्योंकि कंपनी ने अपने रेवेन्यू टारगेट मिस किए और गाइडेंस भी घटा दी। अब निवेशकों की नजर अगस्त के इन्फ्लेशन डेटा पर टिकी है, जो यह तय करेगा कि फेडरल रिजर्व आगे क्या कदम उठाएगा।
