अगस्त में US में जॉब ओपनिंग्स गिरकर **7.08 मिलियन** रह गई हैं, जो कि **7.2 मिलियन** के अनुमान से काफी कम है। यह सुस्त होता लेबर मार्केट फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों और भारतीय IT सेक्टर की डिमांड के लिए एक बड़ा संकेत है।
अमेरिकी लेबर मार्केट में अगस्त के दौरान सुस्ती के संकेत मिले हैं। ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स की रिपोर्ट के अनुसार, कुल जॉब ओपनिंग्स 7.08 मिलियन रह गईं, जो जुलाई के 7.34 मिलियन के संशोधित आंकड़ों से कम हैं। विशेषज्ञों को उम्मीद थी कि यह आंकड़ा कम से कम 7.2 मिलियन रहेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। यह साफ दिखाता है कि अमेरिकी कंपनियां अब नई भर्तियों में सावधानी बरत रही हैं।
भारतीय निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?
भारतीय बाजार के नजरिए से यह डेटा बेहद अहम है, क्योंकि यह सीधे तौर पर अमेरिका की इकोनॉमी की सेहत बताता है। फेडरल रिजर्व ब्याज दरों पर फैसला लेते समय लेबर मार्केट को बहुत करीब से देखता है। अगर वहां सुस्ती आती है, तो फेड दरों में कटौती या उन्हें स्थिर रखने का फैसला ले सकता है, जो ग्लोबल मार्केट के लिए अच्छी खबर हो सकती है।
IT सेक्टर पर पड़ेगा दबाव?
भारत की बड़ी IT कंपनियां काफी हद तक अमेरिकी ग्राहकों पर निर्भर हैं। यदि वहां की कंपनियां नई नियुक्तियों में कटौती कर रही हैं, तो वे अपने डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट्स और टेक्नोलॉजी बजट में भी देरी कर सकती हैं। यह सीधा असर भारत की IT कंपनियों के रेवेन्यू पर पड़ सकता है।
वर्कफोर्स में स्थिरता
भले ही नई नौकरियां कम हुई हों, लेकिन राहत की बात यह है कि लेफ-ऑफ (Layoff) की दर अभी भी कम है और लोग अपनी मर्जी से नौकरियां नहीं छोड़ रहे हैं। इसका मतलब है कि कंपनियां नई भर्ती तो नहीं कर रही हैं, लेकिन मौजूदा कर्मचारियों को हटा भी नहीं रही हैं। फिलहाल, ऊंची एनर्जी कॉस्ट और इकोनॉमी की अनिश्चितता का दबाव वहां साफ दिख रहा है। अब निवेशकों की नजरें सितंबर की जॉब्स रिपोर्ट पर टिकी हैं, जहां पेरोल्स में 95,000 की बढ़ोतरी और बेरोजगारी दर 4.1% के आसपास रहने का अनुमान है।
