अमेरिका में सितंबर के महीने में महंगाई दर बढ़कर **3.7%** के स्तर पर पहुंच गई है। पेट्रोल की कीमतों में उछाल के कारण अब बाजार में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि Federal Reserve अक्टूबर में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है।
महंगाई का बढ़ा पारा
अमेरिका से आए ताजा डेटा के अनुसार, सितंबर में महंगाई 3.7% दर्ज की गई है, जो अगस्त के 3.4% के मुकाबले काफी ज्यादा है। इस महंगाई के पीछे सबसे बड़ी वजह पेट्रोल की कीमतों में 9.1% का उछाल है। ग्लोबल एनर्जी मार्केट में जारी अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) की वजह से ये दाम बढ़े हैं।
फेडरल रिजर्व पर क्या पड़ेगा असर?
इस डेटा के बाद 27-28 अक्टूबर को होने वाली Federal Reserve की बैठक में ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। बैठक से पहले जहां दरें बढ़ने की संभावना 22% थी, वह अब बढ़कर 40% से 46% के बीच पहुंच गई है। ब्याज दरें बढ़ने का मतलब है कि कर्ज लेना महंगा होगा और डॉलर के साथ-साथ अमेरिकी सरकारी बॉन्ड (Treasury Yields) में निवेशकों का आकर्षण बढ़ जाएगा।
भारतीय निवेशकों के लिए चिंता?
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में इस बदलाव का असर भारत पर पड़ना तय माना जा रहा है:
- FPI फ्लो: जब अमेरिका में ब्याज दरें ज्यादा होती हैं, तो विदेशी निवेशक (FPI) भारतीय बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिका की सुरक्षित एसेट्स में लगाने लगते हैं, जिससे घरेलू बाजार में हलचल बढ़ सकती है।
- रुपये पर दबाव: डॉलर मजबूत होने से भारतीय रुपये की चाल पर असर पड़ता है, जिससे आयात (Import) महंगा हो सकता है।
- IT सेक्टर: अमेरिका में महंगाई और हाई इंटरेस्ट रेट्स से वहां की कंपनियों के IT बजट पर असर पड़ सकता है, जिसका सीधा प्रभाव भारतीय IT कंपनियों की कमाई पर देखने को मिल सकता है।
आने वाले हफ्तों में निवेशकों की नजर क्रूड ऑयल की कीमतों और फेडरल रिजर्व के आधिकारिक बयानों पर टिकी रहेगी, क्योंकि यही तय करेगा कि ग्लोबल मार्केट में आगे क्या रुख रहने वाला है।
