अमेरिका में अगस्त के दौरान महंगाई के आंकड़े केवल **0.2%** बढ़े हैं, जिससे बाजार में यह उम्मीद बढ़ गई है कि फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर रोक लगा सकता है। भारतीय निवेशकों के लिए यह एक सकारात्मक खबर है क्योंकि अमेरिकी दरों के स्थिर होने से विदेशी निवेशकों का रुख उभरते बाजारों की ओर हो सकता है।
बाजार को क्यों है उम्मीद?
अमेरिका में महंगाई के ताजा आंकड़ों के बाद से मार्केट का मूड बदल गया है। फेडरल रिजर्व का पसंदीदा पैमाना, 'पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर इंडेक्स', अगस्त में महज 0.2% बढ़ा है। पिछले आंकड़ों में संशोधन और इस सुस्त बढ़ोतरी को देखते हुए निवेशकों का मानना है कि अक्टूबर की बैठक में सेंट्रल बैंक ब्याज दरों को जस का तस रख सकता है। मार्केट में फिलहाल रेट हाइक की संभावना 40% से भी कम दिख रही है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या है खास?
अमेरिकी मौद्रिक नीति में इस बदलाव का सीधा असर भारत पर पड़ता है। जब फेडरल रिजर्व दरों में बढ़ोतरी को रोकने का संकेत देता है, तो ग्लोबल मार्केट में स्थिरता आती है। ऊंची अमेरिकी दरों के चलते अक्सर पैसा उभरते बाजारों से निकलकर अमेरिकी बॉन्ड्स की ओर चला जाता है, लेकिन दरों के स्थिर होने से भारतीय बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का भरोसा बढ़ सकता है और रुपये की वोलाटिलिटी (volatility) भी कम हो सकती है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती
महंगाई ठंडी होने के बावजूद अमेरिकी इकोनॉमी में काफी दम है। अगस्त में कंज्यूमर स्पेंडिंग में जोरदार उछाल देखा गया और लेबर मार्केट भी स्थिर है। कॉरपोरेट जगत में भी हलचल तेज है:
- Eli Lilly & Co. ने अपनी ओबेसिटी दवा के सफल ट्रायल की रिपोर्ट दी है।
- Hewlett Packard Enterprise ने $1.2 बिलियन का सर्वर हार्डवेयर कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया है।
- डिफेंस सेक्टर में Boeing Co. ने Northrop Grumman Corp. को पछाड़ते हुए अमेरिकी नौसेना के लिए फाइटर जेट का नया कॉन्ट्रैक्ट जीता है।
भविष्य में निवेशकों को अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट और आने वाले अर्निंग सीजन पर नजर रखनी होगी, ताकि यह समझा जा सके कि क्या यह इकोनॉमिक मोमेंटम आगे भी जारी रहेगा या नहीं।
