भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड एग्रीमेंट का काम आखिरी चरण में है। साथ ही, अमेरिका ने रूसी एनर्जी पर लगे प्रतिबंधों की **60-दिनों** की समीक्षा शुरू कर दी है, जिससे भारत के लिए तेल आयात का रास्ता आसान हो सकता है।
अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट Marco Rubio ने पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक बातचीत अब फाइनल कानूनी ड्राफ्टिंग के दौर में है। इस बड़े कदम के साथ ही अमेरिका ने अपनी एनर्जी पॉलिसी में लचीलापन दिखाते हुए रूसी तेल आयात से जुड़े प्रतिबंधों की 60-दिवसीय समीक्षा शुरू की है। यह फैसला यह दर्शाता है कि अमेरिका समझता है कि भारत को अपने एनर्जी सोर्सेज को डायवर्सिफाई करने के लिए समय चाहिए।
रिस्क और राहत
इस कदम से 'Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act' के तहत संभावित खतरों से अस्थाई राहत मिली है। पहले ऐसी चिंताएं थीं कि रूसी ईंधन खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लग सकता है। अब समीक्षा के जरिए अमेरिका एक व्यावहारिक रुख अपना रहा है, जिससे दिल्ली के साथ अपने रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत किया जा सके।
बिजनेस पर असर
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस डील के पहले फेज के कानूनी ड्राफ्टिंग स्टेज में होने की पुष्टि की है। गुजरात जैसे रिफाइनरी हब्स में ऊर्जा आयात की अहमियत को देखते हुए यह समझौता काफी मायने रखता है।
आने वाले दिनों में Marco Rubio मुंबई और जामनगर का दौरा करेंगे। निवेशकों के लिए यह डिप्लोमेटिक प्रोग्रेस काफी अहम है, क्योंकि इसका सीधा असर मैन्युफैक्चरिंग, फार्मा और IT सेक्टर के रेगुलेटरी माहौल पर पड़ेगा। हालांकि, अंतिम आर्थिक प्रभाव डील की शर्तों पर ही निर्भर करेगा।
