अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार वार्ता टूटने के बाद कनाडाई सामानों पर **50%** टैरिफ लगा दिया है। कनाडा के प्रधानमंत्री ने डॉलर-फॉर-डॉलर जवाबी टैरिफ का वादा किया है, जिससे सीमा पार सप्लाई चेन के लिए जोखिम बढ़ गया है। यह विवाद मौजूदा व्यापार शुल्कों पर शर्तों पर सहमत होने में विफलता के कारण उत्पन्न हुआ है, जिसका असर विनिर्माण से लेकर उपभोक्ता वस्तुओं तक पर पड़ रहा है।
अमेरिका का बड़ा कदम: 50% टैरिफ
संयुक्त राज्य अमेरिका ने कनाडा के लगभग 20 अरब डॉलर से 28 अरब डॉलर के निर्यात पर 50% का भारी टैरिफ लगा दिया है। यह कदम दोनों देशों के बीच व्यापार तनाव को गंभीर रूप से बढ़ाता है। यह टैरिफ, जो शनिवार तड़के से प्रभावी हुए हैं, कनाडा के अमेरिका को होने वाले वार्षिक निर्यात का लगभग 5% हिस्सा कवर करते हैं। इनमें मेडिकल सप्लाई, इलेक्ट्रिकल उपकरण, डेयरी उत्पाद और हॉकी स्टिक जैसे खेल के सामान शामिल हैं।
व्यापार वार्ता का अंत
यह टैरिफ ऐसे समय में लगाए गए हैं जब द्विपक्षीय व्यापार विवादों को सुलझाने के लिए की गई अंतिम क्षण की बातचीत टूट गई है। शुरुआती 19 अगस्त की समय सीमा को तीन दिनों के लिए बढ़ाने के बावजूद, दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके। इसके जवाब में, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने घोषणा की कि कनाडा अपने घरेलू श्रमिकों और उद्योगों की रक्षा के लिए डॉलर-फॉर-डॉलर जवाबी उपाय लागू करेगा। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि प्रभावित क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त सहायता पर विचार किया जा रहा है, जबकि कनाडाई प्रतिनिधिमंडल को वार्ता से वापस बुला लिया गया है।
दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर बातचीत टूटने का आरोप लगाया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि, जैमिसन ग्रीर ने कनाडाई पक्ष से "नई मांगों और अन्य प्रतिबद्धताओं से पीछे हटने" का हवाला दिया। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री कार्नी ने अमेरिकी प्रस्तावों को "अनुचित" और "अनुत्पादक" बताया। वाशिंगटन ने टैरिफ एक्ट 1930 की धारा 338 का हवाला दिया, जिसके तहत राष्ट्रपति उन देशों पर आयात कर लगा सकते हैं जो अमेरिकी व्यावसायिक हितों के साथ भेदभाव करते हैं।
सप्लाई चेन और सेक्टरों पर असर
इस विवाद का आर्थिक प्रभाव केवल कर लगाए गए विशिष्ट सामानों से कहीं आगे तक जाता है। अमेरिका और कनाडा के बीच सालाना 880 अरब डॉलर से अधिक का व्यापार होता है। ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग, स्टील और एल्यूमीनियम जैसे उद्योग, जो जटिल, सीमा पार सप्लाई चेन पर निर्भर हैं, संभावित व्यवधान का सामना कर सकते हैं। कच्चे माल या तैयार कंपोनेंट्स की बढ़ती लागत सीमा पार काम करने वाली कंपनियों के लाभ मार्जिन पर दबाव डाल सकती है, जिससे इन सेक्टरों की निगरानी करने वाले निवेशकों के लिए अनिश्चितता पैदा हो गई है।
यह व्यापक विवाद उत्तरी अमेरिकी व्यापार समझौते के भविष्य पर भी एक छाया डालता है, क्योंकि कनाडा के साथ बातचीत रुकी हुई है। जबकि अमेरिका ने मेक्सिको के साथ अलग से चर्चा की है, वाशिंगटन और ओटावा के बीच सख्त रुख ने उत्तरी अमेरिकी व्यापार संबंधों के लिए महत्वपूर्ण अस्थिरता पैदा की है। निवेशक कनाडाई जवाबी उपायों के विशिष्ट विवरण और किसी भी अतिरिक्त सरकारी सहायता पैकेज की निगरानी कर सकते हैं, जो इस संघर्ष की अवधि और गंभीरता को दर्शाएंगे।
