US Department of Labor द्वारा प्रमुख IT कंपनियों के लिए PERM प्रोग्राम को सस्पेंड करने और रियाद में Houthi मिसाइल हमलों ने वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ा दी है।
दुनियाभर के वित्तीय बाजारों में आज दो बड़े भू-राजनीतिक और परिचालन संबंधी झटकों के कारण भारी अनिश्चितता का माहौल है। US में एक नए इमिग्रेशन निर्देश ने टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए PERM फाइलिंग पर रोक लगा दी है, जबकि सऊदी अरब में हुए घातक मिसाइल हमले ने मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा दिया है।
IT कंपनियों पर असर
US Department of Labor के इस फैसले का असर 8 बड़ी कंपनियों पर पड़ा है, जिनमें Tata Consultancy Services, Infosys, Wipro, HCL Technologies, Cognizant, Microsoft, Adobe और Capgemini शामिल हैं। हालांकि H-1B वीजा या रिन्यूअल पर इसका असर नहीं होगा, लेकिन ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया रुकने से भारतीय IT सेक्टर की 'टैलेंट मोबिलिटी' प्रभावित होगी और कंपनियों की ऑपरेशनल लागत बढ़ने का खतरा है।
कच्चे तेल में उछाल और हवाई यात्रा पर रोक
रियाद के King Khalid International Airport पर हुए मिसाइल हमले के बाद Air India और Akasa Air जैसी विमानन कंपनियों ने सऊदी अरब के लिए उड़ानें रोक दी हैं। इस तनाव के चलते ग्लोबल एनर्जी मार्केट में घबराहट है और Brent Crude Oil की कीमतें बढ़कर $105 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। यदि मिडिल ईस्ट में अस्थिरता जारी रही, तो इसका सीधा असर महंगाई और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट पर पड़ेगा।
निवेशकों के लिए संकेत
फिलहाल निवेशक इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि IT कंपनियां अपनी आंतरिक नीतियों में क्या बदलाव करती हैं और भू-राजनीतिक स्थिति कब सामान्य होती है। एनर्जी कॉरिडोर में किसी भी तरह का व्यवधान आने वाले हफ्तों में बाजार के लिए बड़ा रिस्क फैक्टर बना रहेगा।
