अमेरिका में 'Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026' में एक संशोधन पेश किया गया है, जिसके तहत भारत से होने वाले निर्यात पर **100%** ड्यूटी लगाने की बात कही गई है। यह बिल फिलहाल अमेरिकी हाउस रूल्स कमेटी के पास है।
बिल का मुख्य कारण
अमेरिकी प्रतिनिधि स्टेनी होयर द्वारा प्रस्तावित यह संशोधन रूस से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की खरीद को निशाना बनाता है। इस बिल का मकसद उन देशों पर आर्थिक दबाव बनाना है जो रूस के साथ ऊर्जा व्यापार कर रहे हैं। वर्तमान में यह बिल हाउस रूल्स कमेटी के विचाराधीन है, जिस पर नवंबर 2026 के मिड-टर्म चुनावों से पहले निर्णय होना है।
राहत की उम्मीद?
अभी यह केवल एक प्रस्ताव है और कानून नहीं बना है। अमेरिकी कांग्रेस में इस पर तीखी बहस जारी है। प्रतिनिधि ग्रेगरी मीक्स ने एक काउंटर-संशोधन पेश किया है, जो राष्ट्रपति को ऐसे सेकेंडरी टैरिफ लगाने की शक्ति देने वाले सेक्शन 113 को हटाने की मांग करता है। इससे साफ है कि अंतिम कानून अभी भी अनिश्चितता के दौर में है।
भारतीय बाजार पर क्या असर?
यदि यह कड़ा कदम उठाया जाता है, तो भारत के एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर, खासकर IT सर्विसेज, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग पर भारी मार्जिन दबाव आ सकता है। अमेरिकी खरीदारों के लिए भारतीय सामान महंगा हो जाएगा, जिससे मांग में गिरावट आ सकती है या भारतीय कंपनियों को अपने प्रॉफिट मार्जिन कम करने पड़ सकते हैं। निवेशकों को वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच होने वाली आधिकारिक बातचीत और बिल के घटनाक्रम पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
