US Federal Reserve की अहम बैठक 15-16 सितंबर को होने वाली है, जहां ब्याज दरें **3.50%** से **3.75%** के दायरे में रहने पर चर्चा होगी। गणेश चतुर्थी की छुट्टी के कारण भारतीय बाजार आज बंद हैं, लेकिन ग्लोबल संकेत खुलने वाले बाजार में उतार-चढ़ाव पैदा कर सकते हैं।
बैठक का महत्व और इन्फ्लेशन का दबाव
वॉशिंगटन में Federal Open Market Committee (FOMC) की बैठक 15 और 16 सितंबर 2026 को होने जा रही है। इस बैठक पर दुनिया भर की नजरें हैं क्योंकि फिलहाल फेडरल फंड्स रेट 3.50% से 3.75% के बीच बने हुए हैं। मुख्य चुनौती 3.4% की वार्षिक इन्फ्लेशन (महंगाई) है, जिसके कारण फेड के लिए यह तय करना मुश्किल है कि ब्याज दरों को स्थिर रखा जाए या महंगाई को काबू में करने के लिए और सख्ती की जाए।
भारतीय बाजारों पर असर
गणेश चतुर्थी के मौके पर भारतीय शेयर बाजार आज बंद हैं। यह छुट्टी घरेलू निवेशकों के लिए एक राहत की तरह है, क्योंकि उन्हें ग्लोबल बाजार की शुरुआती हलचल से सुरक्षा मिल गई है। हालांकि, जब बाजार दोबारा खुलेंगे, तो फेड के फैसलों का असर साफ तौर पर दिखेगा।
जब भी US Central Bank ब्याज दरें बढ़ाता है, तो अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है। इसका सीधा असर भारत जैसे उभरते बाजारों पर पड़ता है, जहां से विदेशी निवेशक पैसा निकालकर सुरक्षित डॉलर एसेट में शिफ्ट कर देते हैं। इससे भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ता है और बाजार में अस्थिरता आ सकती है।
फेड चेयरमैन की रणनीति
फेड चेयरमैन Kevin Warsh पहले ही संकेत दे चुके हैं कि वे 'डेटा-ड्रिवन' अप्रोच अपनाएंगे। निवेशकों को डर है कि अगर ग्लोबल बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो इसका असर भारत में कर्ज लेने की लागत और इक्विटी वैल्यूएशन पर पड़ेगा। इसके अलावा, सोने और कच्चे तेल जैसी कमोडिटी की कीमतों में भी तेज हलचल देखने को मिल सकती है।
फेडरल रिजर्व का आधिकारिक ऐलान 16 सितंबर को रात 11:30 बजे (IST) होगा। इसके बाद होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए संकेतों से साफ होगा कि आने वाले महीनों में ग्लोबल और भारतीय बाजार का रिस्क एपेटाइट कैसा रहने वाला है।
