अमेरिका के फेडरल रिजर्व (US Fed) ने सबको चौंकाते हुए ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह फैसला भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है, क्योंकि RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक इसी हफ्ते होनी है।
फेडरल रिजर्व का बड़ा फैसला
अमेरिका के फेडरल रिजर्व (US Fed) ने अपने एक अप्रत्याशित फैसले में ब्याज दरों को 3.5% से 3.75% के बीच स्थिर रखने का निर्णय लिया है। हालांकि, ज्यादातर अर्थशास्त्रियों को 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की उम्मीद थी, फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) ने फिलहाल इस बढ़ोतरी को टाल दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में महंगाई दर अभी भी 3.5% (जून के आंकड़ों के अनुसार) के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। ऐसे में फेड के चेयरमैन केविन वॉर्श के सामने महंगाई पर काबू पाने और आर्थिक विकास तथा वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।
भारत के लिए क्यों है राहत की खबर?
फेडरल रिजर्व के इस फैसले ने भारतीय बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण, हालांकि अस्थायी, राहत प्रदान की है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक इसी हफ्ते होनी है। अगर फेड ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता, तो इससे डॉलर मजबूत हो सकता था, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों से पूंजी का बहिर्वाह (capital outflow) हो सकता था और भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता था।
इसके अलावा, ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनावों के कारण जुलाई में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में 22% की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में, डॉलर का स्थिर रहना RBI को घरेलू आयात लागत और महंगाई की उम्मीदों को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में मदद करेगा।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था की स्थिति
अमेरिकी अर्थव्यवस्था फिलहाल मिले-जुले संकेतों के बीच चल रही है। ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक एनालिसिस के अनुसार, दूसरी तिमाही में GDP ग्रोथ घटकर 1.5% रह गई, जो पहली तिमाही के 2.1% से कम है। इसके अलावा, अमेरिकी श्रम बाजार में भी ठहराव के संकेत दिख रहे हैं, जहां रोजगार के आंकड़े मुख्य रूप से कार्यबल से बाहर निकलने वाले लोगों द्वारा समर्थित हैं।
निवेशक अमेरिकी शेयर बाजारों पर भी करीब से नजर रख रहे हैं, जहां इस साल S&P 500 में 9% से अधिक की तेजी आई है। इस तेजी का बड़ा श्रेय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और टेक्नोलॉजी में हुए निवेश को जाता है।
विश्लेषकों को इस बात की चिंता है कि इन टेक्नोलॉजी-संचालित निवेशों को फंड करने के लिए कर्ज का बहुत अधिक इस्तेमाल किया जा रहा है। अगर भविष्य में ब्याज दरों में बढ़ोतरी होती है, तो इससे कर्ज और संपत्ति की कीमतों में पुनर्मूल्यांकन (repricing) हो सकता है, जो बाजार की धारणा को अस्थिर कर सकता है। दक्षिण कोरियाई शेयर बाजार में हालिया अस्थिरता, जो AI-संबंधित संपत्ति मूल्यांकन में बदलाव से जुड़ी है, वैश्विक बाजारों के लिए संभावित जोखिमों को उजागर करती है।
निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
हालांकि फेड ने फिलहाल दरों में बढ़ोतरी रोकी है, लेकिन सितंबर में दरें बढ़ाने की संभावना एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बनी हुई है। यह भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई के आंकड़ों के विकास पर काफी हद तक निर्भर करेगा। भारतीय निवेशकों का ध्यान अब आगामी RBI MPC बैठक के नतीजों पर केंद्रित होगा। निवेशक इस बात पर नज़र रख सकते हैं कि RBI अपनी वर्तमान ब्याज दर की स्थिति को बनाए रखता है या बढ़ती वैश्विक ऊर्जा कीमतों के सामने महंगाई और मुद्रा की अस्थिरता को प्रबंधित करने के अपने दृष्टिकोण में बदलाव का संकेत देता है।
