अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भारत से कहा है कि व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए टैक्स और बौद्धिक संपदा (IP) से जुड़े नियमों को और अधिक पूर्वानुमानित (predictable) बनाने की ज़रूरत है। दोनों देशों का लक्ष्य **$500 बिलियन** के व्यापार तक पहुँचना है, और इन नियामकीय अड़चनों को दूर करना निवेशकों का विश्वास बढ़ाने के लिए अहम माना जा रहा है।
क्यों ज़रूरी हैं ये सुधार?
भारत में अमेरिकी राजदूत, सर्जियो गोर, ने दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को और गहरा करने के लिए भारत से टैक्सेशन (Taxation) और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क (Regulatory Framework) को ज़्यादा स्पष्ट बनाने का आग्रह किया है। 18 अगस्त, 2026 को इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (IACC) के नेशनल कन्वेंशन में बोलते हुए, राजदूत ने इस बात पर ज़ोर दिया कि द्विपक्षीय संबंध भले ही बढ़ रहे हों, लेकिन अमेरिकी निवेश की पूरी क्षमता को हासिल करने के लिए कुछ खास अड़चनों को दूर करना बहुत ज़रूरी है।
बौद्धिक संपदा (IP) और निवेशकों का भरोसा
राजदूत के भाषण का एक अहम हिस्सा था मजबूत बौद्धिक संपदा (IP) सुरक्षा का महत्व। उन्होंने कहा कि ज़्यादा मज़बूत सुरक्षा उपायों से अमेरिकी इनोवेटर्स (Innovators) को भारत में अपने कामकाज को बढ़ाने का ज़रूरी भरोसा मिलेगा। निवेशकों के लिए, IP सुरक्षा अक्सर यह तय करने में एक प्राथमिक विचार होती है कि वे कहाँ पूंजी लगाएं या रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) सेंटर स्थापित करें। राजदूत ने सुझाव दिया कि IP चोरी को लेकर मौजूदा चिंताएं फिलहाल एक बाधा का काम कर रही हैं, और कुछ कंपनियां कहती हैं कि अगर ये सुरक्षा उपाय और मज़बूती से स्थापित होते तो वे भारत में विस्तार करना पसंद करतीं।
$500 बिलियन व्यापार की राह
दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी में काफी बढ़ोतरी हुई है, पिछले दो दशकों में वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार $240 बिलियन से ज़्यादा हो गया है। दोनों देशों ने 2030 तक $500 बिलियन के व्यापार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य तक पहुँचने के लिए व्यापार और निवेश के प्रवाह में लगातार तेज़ी की ज़रूरत होगी।
हालांकि, राजदूत ने बताया कि रेगुलेटरी अनिश्चितता (Regulatory Uncertainty) कभी-कभी इस प्रगति में बाधा डाल सकती है। जब टैक्स प्रैक्टिस या रेगुलेटरी ज़रूरतें अप्रत्याशित (unpredictable) लगती हैं, तो कंपनियां वैकल्पिक निवेश गंतव्यों का रुख कर सकती हैं, जैसे कि दक्षिण पूर्व एशिया के देश, जहाँ अक्सर ज़्यादा सुव्यवस्थित फ्रेमवर्क मिलते हैं।
जारी व्यापार वार्ता
निवेशकों और बाज़ार पर नज़र रखने वालों के लिए, अगली महत्वपूर्ण बात यह है कि चल रही द्विपक्षीय व्यापार समझौते की वार्ताओं में कितनी प्रगति होती है। ये बातचीत, जो एक अंतरिम व्यापार फ्रेमवर्क की ओर पहले के कदमों के बाद हो रही हैं, लंबे समय से चले आ रहे व्यापारिक विवादों को सुलझाने और टैरिफ (Tariff) संबंधी तनावों को दूर करने के लिए हैं। इन वार्ताओं का सफल समापन प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में बढ़ोतरी का एक संभावित ट्रिगर (Trigger) माना जा रहा है, क्योंकि यह व्यवसायों के लिए दीर्घकालिक योजना के लिए आवश्यक रेगुलेटरी स्थिरता प्रदान करेगा।
