2026 के मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने US हाउस और सीनेट पर कब्जा जमा लिया है। ईरान के साथ चल रहे युद्ध के बेतहाशा खर्च से नाराज जनता के फैसले का असर ग्लोबल मार्केट पर दिखा है, जहां तेल की कीमतों में **8%** की गिरावट आई है।
नवंबर 2026 के मिडटर्म चुनावों के नतीजों ने अमेरिका की राजनीति की दिशा पूरी तरह बदल दी है। डेमोक्रेटिक पार्टी को हाउस और सीनेट दोनों में स्पष्ट बहुमत मिला है। इस हार के पीछे सबसे बड़ी वजह ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष को माना जा रहा है, जिस पर अक्टूबर 2026 तक अमेरिका $47 बिलियन से अधिक खर्च कर चुका है।
चुनावी नतीजों का असर और प्रतिक्रिया
जनता में बढ़ते गुस्से और महंगाई का सीधा असर वोटिंग पर दिखा। राष्ट्रपति Donald Trump और वाइस प्रेसिडेंट JD Vance ने भी स्वीकार किया कि युद्ध में हो रहा बेतहाशा खर्च पार्टी की हार का मुख्य कारण रहा। इस राजनीतिक उठापटक का असर सीधे ग्लोबल कमोडिटी मार्केट पर पड़ा है, जिससे ऑयल की कीमतों में 8% की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
भारत दुनिया में क्रूड ऑयल के सबसे बड़े इंपोर्टर्स में से एक है, इसलिए वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में कोई भी हलचल सीधे घरेलू महंगाई और भारतीय रुपये की वैल्यू को प्रभावित करती है।
जनवरी 2027 से जब डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाली नई कांग्रेस सत्ता संभालेगी, तो वाइट हाउस और कांग्रेस के बीच 'लेजिस्लेटिव ग्रिडलॉक' की स्थिति बनने की पूरी आशंका है। हाउस स्पीकर Mike Johnson के इस्तीफे की घोषणा ने वाशिंगटन में अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि नई कांग्रेस ईरान युद्ध की फंडिंग को लेकर क्या रुख अपनाती है, क्योंकि यही फैसला आने वाले दिनों में ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल और इकोनॉमिक स्टेबिलिटी तय करेगा।
