ICICI Bank के अनुमानों के मुताबिक, US Congress में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत हो सकता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि ट्रेड पॉलिसी में तुरंत कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखेगा। निवेशकों को डेटा सेंटर रेगुलेशन और US डेट सीलिंग डिबेट पर नजर रखने की जरूरत है।
सत्ता का बदलता समीकरण
ICICI Bank की लेटेस्ट प्रोजेक्शन के अनुसार, आगामी मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी के दोनों सदनों पर कब्जा करने की संभावना 63% है। हाउस (House) में जीत की संभावना 90.9% और सीनेट (Senate) में 64% बताई गई है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे वॉशिंगटन का सियासी संतुलन बदलेगा, लेकिन भारतीय निवेशकों को ट्रेड पॉलिसी में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।
अमेरिकी राष्ट्रपति के पास वीटो पावर और एग्जीक्यूटिव अथॉरिटी होती है, जो ट्रेड ढांचे को किसी भी अचानक हुए विधायी बदलावों (Legislative changes) से सुरक्षित रखती है। भारतीय कंपनियों को हालांकि प्रशासनिक रुकावटों और नीतिगत विवादों के लिए तैयार रहना चाहिए।
डेटा सेंटर्स पर बढ़ती सख्ती
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर्स में निवेश तो जारी रहेगा, लेकिन अब ये इंफ्रास्ट्रक्चर पर्यावरण संबंधी चर्चाओं के घेरे में हैं। डेटा सेंटर्स द्वारा भारी मात्रा में पानी और बिजली की खपत नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बन गई है।
डेटा बताता है कि स्विंग स्टेट्स में केवल 15% डेटा सेंटर क्षमता है, इसलिए स्थानीय चुनाव परिणामों का पूरे देश के इंफ्रास्ट्रक्चर पर असर सीमित हो सकता है। लेकिन, डेटा सेंटर्स की सस्टेनेबिलिटी मेट्रिक्स अब एक नया रिस्क फैक्टर बनकर उभर रही हैं, जो भविष्य में ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ा सकती हैं।
डेट सीलिंग और मार्केट रिस्क
मार्केट के लिए सबसे बड़ा रिस्क US का वित्तीय आउटलुक है। साल 2026 के अंत तक, अमेरिका पर कर्ज का बोझ $40 ट्रिलियन के करीब पहुंच गया है, जो $41.1 ट्रिलियन की सीमा के बेहद करीब है। डेट सीलिंग पर होने वाली राजनीतिक बहस से ग्लोबल मार्केट्स में भारी उतार-चढ़ाव (Volatility) देखने को मिल सकती है, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए बिजनेस लागत बढ़ सकती है।
