Kautilya Economic Conclave में अमेरिकी अर्थशास्त्री Michael Greenstone ने भारत के विकास को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने US की ट्रेड नीतियों और बढ़ती एनर्जी कीमतों को ग्लोबल निवेश के लिए जोखिम बताया है।
नई दिल्ली में आयोजित 5वें Kautilya Economic Conclave में अमेरिकी सरकार के पूर्व चीफ इकोनॉमिस्ट Michael Greenstone ने ग्लोबल ग्रोथ और ट्रेड डायनामिक्स पर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ कहा कि भारत का विकास पश्चिमी देशों के लिए खतरा नहीं, बल्कि ग्लोबल इकोनॉमी के लिए एक सकारात्मक शक्ति है। यह भारतीय निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है कि दुनिया भारत को कैसे देख रही है।
ट्रेड पॉलिसी और अनिश्चितता का संकट
Greenstone ने मौजूदा अमेरिकी ट्रेड नीतियों को 'असंरचित' (unstructured) करार दिया। उनका कहना है कि अचानक होने वाले बदलाव और अनिश्चितता लॉन्ग-टर्म कैपिटल निवेश के लिए सबसे बड़ी बाधा हैं। टैरिफ (tariffs) के इस्तेमाल पर उन्होंने कहा कि ये घरेलू उद्योगों को बचाने के नाम पर आम उपभोक्ताओं पर लागत का बोझ बढ़ा देते हैं। इसका सीधा असर भारत के आईटी और फार्मा जैसे एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर पर भी पड़ सकता है, जिस पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए।
एनर्जी मार्केट और क्रूड ऑयल की चिंता
एनर्जी सेक्टर पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि $100 प्रति बैरल के ऊपर बने क्रूड ऑयल की कीमतें भारत जैसे देशों के लिए महंगाई का कारण बनती हैं। हालांकि उन्होंने अर्जेंटीना और वेनेजुएला से सप्लाई बढ़ने की उम्मीद जताई है, लेकिन फिलहाल शॉर्ट-टर्म स्टेबिलिटी के आसार कम हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश अब 'Strait of Hormuz' पर निर्भरता कम कर नए और सुरक्षित रूट तलाश रहे हैं।
अमेरिका का कर्ज और ग्लोबल असर
Greenstone ने अमेरिकी बजट डेफिसिट को भी चिंताजनक बताया, जो फिलहाल GDP के 6% से 7% के स्तर पर है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह रफ्तार टिकाऊ नहीं है। अमेरिका की यह वित्तीय स्थिति ग्लोबल इंटरेस्ट रेट्स, डॉलर की मजबूती और उभरते बाजारों (जैसे भारत) में आने वाले निवेश के फ्लो को सीधे तौर पर प्रभावित करती है।
