सितंबर के महंगाई के आंकड़ों ने बाजार को चौंका दिया है, जिसके बाद US Dollar में भारी उछाल आया है। डॉलर इंडेक्स **18 महीने** के ऊपरी स्तर पर पहुंच गया है, जिससे Fed द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना और मजबूत हो गई है।
सितंबर में आई महंगाई की ताजा रिपोर्ट के बाद ग्लोबल मार्केट की धारणा पूरी तरह बदल गई है। डॉलर इंडेक्स, जो दुनिया की प्रमुख करेंसीज के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापता है, 0.68% की बढ़त के साथ 102.86 के स्तर पर पहुंच गया है।
महंगाई ने बढ़ाई टेंशन
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) सालाना आधार पर 3.7% रहा, जबकि अनुमान 3.6% का था। मुख्य महंगाई (कोर इन्फ्लेशन) भी 2.6% रही, जो उम्मीदों से ज्यादा है। इस तेजी के पीछे गैसोलीन की कीमतों में आया 9.1% का मासिक उछाल एक बड़ी वजह है, जो साफ संकेत देता है कि महंगाई अभी भी सख्त बनी हुई है।
Federal Reserve की रणनीति पर नजर
इस रिपोर्ट के बाद, ट्रेडर्स के बीच फेडरल रिजर्व के रुख को लेकर हलचल मच गई है। अक्टूबर में होने वाली पॉलिसी मीटिंग में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना अब 45% से 56% के बीच आंकी जा रही है। बाजार अब यह मानकर चल रहा है कि केंद्रीय बैंक महंगाई को थामने के लिए अधिक सख्त कदम उठा सकता है।
भारतीय निवेशकों के लिए संकेत
मजबूत डॉलर का मतलब है भारतीय रुपये पर दबाव। इसके कारण क्रूड ऑयल जैसे आयात महंगे हो सकते हैं, जिससे देश के करंट अकाउंट और घरेलू महंगाई पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, अगर अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिका की ओर रुख कर सकते हैं। निवेशकों को अब रुपये की कमजोरी और FII के निवेश पैटर्न पर कड़ी नजर रखनी होगी।
ग्लोबल मार्केट पर असर
इसका असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, यूरो 17 महीने के निचले स्तर $1.1121 पर फिसल गया है और जापानी येन में भी भारी कमजोरी देखी गई है। अब बाजार की नजरें फेडरल रिजर्व की अगली मीटिंग और उनके आधिकारिक बयानों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि आने वाले समय में इक्विटी मार्केट में किस तरह का करेक्शन देखने को मिलेगा।
