US Department of Homeland Security (DHS) ने H-4 वर्क परमिट की समीक्षा का प्रस्ताव अपने लॉन्ग-टर्म रेगुलेटरी एजेंडा में शामिल किया है। फिलहाल किसी भी नियम में कोई बदलाव नहीं हुआ है, और भारतीय IT सेक्टर ने पिछले एक दशक में वीजा-आधारित निर्भरता काफी कम कर ली है।
अमेरिकी सरकार के Department of Homeland Security (DHS) ने अपने लॉन्ग-टर्म रेगुलेटरी एजेंडा में एक प्रस्ताव (RIN 1615-AD14) को शामिल किया है, जो H-4 वीजा धारकों के वर्क परमिट की समीक्षा से जुड़ा है। यह नियम 2015 से लागू है, जो H-1B वीजा धारकों के जीवनसाथी को काम करने की अनुमति देता है।
निवेशकों के लिए क्या है स्थिति?
यह केवल एक प्रशासनिक लिस्टिंग है, न कि कोई नया कानून या तत्काल प्रतिबंध। फिलहाल कोई भी ड्राफ्ट रूल नहीं है और न ही इसके लागू होने की कोई समयसीमा तय है। अमेरिका में कोई भी नीतिगत बदलाव एक लंबी प्रक्रिया से गुजरता है, जिसमें पब्लिक कमेंट और कानूनी समीक्षा शामिल होती है। साल 2017-2018 में भी ऐसी कोशिशें हुई थीं, लेकिन वे कानूनी अड़चनों के कारण सफल नहीं हो पाई थीं।
भारतीय IT सेक्टर पर असर?
भारतीय IT दिग्गज जैसे Tata Consultancy Services, Infosys, Wipro, और HCL Tech ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। इन कंपनियों ने US में स्थानीय स्तर पर भर्ती (Local Hiring) को काफी बढ़ाया है, ताकि वीजा नियमों में बदलाव का असर उनके ऑपरेशंस पर कम से कम पड़े।
आज की तारीख में भारतीय IT कंपनियां एक दशक पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा सुरक्षित हैं। हालांकि, इमीग्रेशन को लेकर अनिश्चितता का माहौल कर्मचारी मनोबल और मोबिलिटी को प्रभावित कर सकता है, लेकिन फिलहाल कंपनियों के रेवेन्यू या मार्जिन पर कोई तात्कालिक खतरा नहीं है। निवेशकों को सलाह है कि वे DHS के आधिकारिक अपडेट्स पर नजर रखें और कंपनियों द्वारा किए जा रहे स्थानीय हायरिंग के आंकड़ों को ट्रैक करें।
